अन्तर्राष्ट्रीय पॉडकास्ट दिवस की शुभकामनाएं ।

अभिव्यक्ति की स्वंतत्रता , ज़िंदगी के मकसद की तलाश, सीखना, बताना, लोगों से जुड़ना, कहानियां सुनाना, टटोलना मन, कहना अनकही, तोड़ना समाज के थोपे मानदंड या फिर असहज कर देना हर उकड़ू बैठी कुंठा को , आखिर क्या है पॉडकास्ट के मायने?

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Yogah Karmasu Kaushalam

योग कर्मसु कौशलम’

योग का अर्थ है अपने कर्म में कुशल होना । जो अपने कार्य में कुशल हैं वे ही योगी कहलाते हैं। एक योगी व्यक्ति के वाणी और कर्म दोनों में कुशलता होती है। योगी व्यक्ति सहजता से शांत और स्थिर चित्त हो जाते हैं और पूरी ऊर्जा और गतिशीलता के साथ उद्यम करते हैं।

योग साधना आत्मोतथान और उच्च ऊर्जा अवस्था के साथ हमारी उपलब्धियों एवं कार्य क्षेत्र में कुशलता का मार्ग प्रशस्त करती है।

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Sri Sri Yoga – Day 1

आज के सत्र से ज्ञान बिंदु:(अनुवाद)

महर्षि पतंजलि कहते हैं

‘योगा चित्त वृत्ति निरोध:’

योग चित्त की चंचलता को वश में करता है।

हमारे मन में 5 वृत्ति या संशोधन होते हैं
1. प्रमना – मन हमेशा प्रमाण मांग रहा है
2. विपरीया – गलत ज्ञान / समझ
3. विकल्प – कल्पना
4. स्मृति – अतीत के छापों की स्मृति
5. निद्र – निद्रा

पूरे दिन में, हमारा दिमाग इन पाँच अवस्थाओं में से किसी एक में रहता है। योग वह क्षण है जब हम चीजों को वैसे ही देखते हैं जैसी वो हैं इस समय हम सो नहीं रहे होते,
पुरानी चीजों को याद नहीं करते, कल्पना या प्रमाण की तलाश नहीं करते।

उस क्षण, हम अपने अंत: से मिल रहे होते हैं, जो आनंद, प्रेम,शांति और ज्ञान का स्रोत है।


Knowledge point from today’s sessions:

Maharishi Patanjali, who is considered the father of yoga says

‘Yogah Chittah Vritti Nirodha’
Yoga is retraining the modulations in the mind

Our mind has 5 vrittis or modulations
1. Pramaana – Mind is always seeking proof
2. Viparyaya – Wrong knowledge/understanding
3. Vikalpa – Imagination
4. Smriti – Memory of past impressions
5. Nidra – Sleep

All through the day, our mind is in one of these modulations. But, if there are those moments when we are not sleeping,
not remembering old things, not imagining or looking for proof and seeing things the way they are then that moment yoga has happened.

At that moment, we are reposing in our Self, which is the source of joy, the source of love, the source of peace and knowledge.

कौन छोटा है और कौन बड़ा?

कोई किसी से उम्र में छोटा बड़ा नहीं हो सकता। जब सभी यहाँ सालों से आते जाते रहे रहे हैं तो किसी के उम्र का क्या हिसाब?

हम सबको केवल आत्म बोध का छुटपन या बड़प्पन होता है बाकी समझिये हम सभी बड़े पुराने हैं ।

पर एक सच ये भी है कि हम में से कुछ इतने पुराने हैं जिनके सानिध्य में नदी और पहाड़ के पास होने का सा सुख रहता है।

मैंने समय समय पर कुछ बड़े पुराने बच्चों का साथ जिया है और कुछ बुजुर्गों को अभी अभी जन्मा सा पाया है।

इसका एहसास एक बात चीत में भी हो जाता है या महज़ देखते रहने से भी। कोई आदत अनजाने में प्रयोग किये गए शब्द , शारीरिक हरकत, या हस्तलेखन सब नए पुराने होने में सांकेतिक होते हैं, लेकिन मेरा यकीन मानिए आप न तो छोटे हैं न बड़े हैं। केवल यात्री हैं।

ये बातें अजीब सी हैं। पता नहीं अचानक ज़ेहन में क्यों आती हैं। अक्सर कोई कुछ ऐसा पूछ देता है जिसके मेसेज का जवाब देते ऐसे जवाब कौंधते हैं। क्या परस्पर बातचीत में ऐसे वाक्यों की जगह बची है?

हाँ बची है।

प्रज्ञा

मुंबई, 26/09/2020