एक डायरी

हर साल बस एक डायरी
बस एक डायरी
और मिलने पर कुछ
कपड़े वपडे
क्रीम पाउडर
कान की बालियाँ
पेन्डेन्ट किताबें
ज़रूरी का सामान
औऱ एक डायरी
मिलती रही।

क्राइस्ट चर्च में जब डायरियाँ नहीं थीं
तब बचपन था
सबा थी, सदफ थी,सनोबर और एक आदिल था
पल्लवी मेरी बी एफ एफ
और खेल कितकित का
जिसे अभिज्ञान की किताब में
हॉप स्किप जम्प कहते हैं
वो खेल कितकित था।
टाइल्स के चिकने टूटे पत्थर
जो आठ घर तक स्लीक सरकते
एक कीमती सामान ।
क्राइस्ट चर्च में जब डायरियाँ नहीं थीं
तब बचपन था ।

जब तक लिखा नहीं
याद कैद रही
जितना कह गयी पन्नों पर
वे भूल गए मुझे
अब खुलती है यादें
तो पूछती हैं यादें
ये तुम हो?
क्या बात कर रही हो?
ऐसी सोई सी
बैगी टी शर्ट
ढीली जीन्स
घोंसले से बाल
नीले फीते की चप्पल
ये तुम हो?

हाँ ये जोधपुर में उस तोप के पीछे मैं हूँ
तवांग में पी टी सो झील के किनारे मैं हूँ
जेमितांग में उस पागल महिला ने आत्महत्या कर ली
हम यहाँ तस्वीर नहीं ले सकते हैं
लेकिन मैं हूँ।
याक के बगल में बूढ़ी काकी की तरह
हरी शाल में हूँ,
शॉल में पीली लाइन जाती है।
बगल में ईशा है।
झरने का पानी ट्रेन में मिले मिनरल वाटर जैसा है
पानी में मिनरल है
पहाड़ से झरना बहता है
गाड़ी बगल खड़ी है
ज़ीरो में मैं हूँ।

जिस दौर तक नहीं लिखे
देखते रहे और जब लिखे
लिखते रहे
मुँह नहीं ताके की करना क्या चाहिए समय का
अरे भई आँख है दुनिया देखे
कैलेंडर में देखे किताब में देखे
हाथ है कुछ बात लिखे
कुंछ नहीं तो नवनीत की कॉपी उठा कर
उसके पीछे लिखे थॉट्स लिखे
गूगल नहीं था।
सात आठ नौ दस की गर्मी छुट्टी में
तीन लाइन की कॉपी उठाये
हैंड राइटिंग लिखे
लिखते रहे
मोती जैसे
रेन एन मार्टिन उठाये
टेन्स बनाये सेंटेंस बनाये
दादा जी सिखाते रहे
अक्षर ये ग्रामर काम न आयेंगे
ये कौन कहता है
बच्चा कभी तो स्कूल में पढ़ेगा
उसको सीखने में काम देता है

फिर मिलती गयी डायरी
डेली का हिसाब
नाप तोल के खर्च
आज क्या किया पे सर्च
सब चला सालों तक
बीच बीच में कुछ
बचकानी कविताएँ हुईं
वे सब धरोहर हैं
एक ज़िंदगी की
मेरी ज़िंदगी की
हॉल के कमरे की
सात फुट की अलमारी में
बाईं तरफ एक अमूल का
कार्टन और उसमें सारी
डायरियाँ सील बन
वे दीवाली की सफाई पर
खुलती हैं।

स्टे मिनिम्लिस्ट का पन्ना बोलता है
फेक दो फेक दो सब फेक दो
पुराना कागज फेक दो
किताब फेक दो कपड़ा फेक दो
वो वसमोल सुपर 30 की काली डाई लगा
पिंक कलर का काला कंघा फेक दो
फेक दी फेक दी
छह माले गिर गईं सफेद आर्टिफिशियल चूड़ियाँ
मैसूर आयीं थीं की बंगलोर से आईं थीं
पेंच थीं उसमें अटक चुकी
टेढ़ी काली रंग छटी चूड़ियाँ फेंक दी
पूजा के फूल दान में जिसमें
निर्माल जाता है विसर्जन को उसमें
दे दिए कपड़े किसी अपने को
जो उनकी देह पर जंचते थे
पर डायरियाँ!

पता नहीं कितनी देर दीवारों को आंखों ने देखा होगा
पता नहीं कितनी देर केहुनी
गद्दे और ठुड्डी के बीच टिकी होगी
कितने रोटोमैक और रेनॉल्ड्स खतम हुए होंगे
वे डायरियाँ
जो मिलती थीं
ज़िम्मेदार होने तक
ज़िम्मेदार बने रहने के लिए
बन्द हैं
पाबंद करती डायरियाँ
बस एक
हर साल मिला करती थी
अलमारी में रखी डायरियाँ
नहीं फेकी जाती हैं
कितने अखबार और किताब बिक चुके हैं
पर वो वाला कार्टन सी प्लस प्लस की किताबों के
साथ मुस्तैद पड़ा है।

Pragya Mishra
21 फरवरी 2019 03.28प्रातः

ट्रैफिक में चाँद से बात

आज रात ऑफिस से निकली तो चाँद चुप चाप सड़क पर भागती गाड़ियों को जाते देख रहा था , मैं और वो आमने सामने थे आज। मुझे निकलने में देर हुई थी। अपने कक्ष में अकेला बैठा कैसा टाइम पास को कुछ देखता होगा न वो भी । उसके पास मोबाइल भी नहीं है न तो मूंगफली । मेरी गाड़ी ट्रैफिक में रुकती है तो पीछे पीछे मूंगफली वाला भी चलता है। आलोक बताते हैं जिस दिन इत्मीनान में चलते मिलें समझलो बड़ा लम्बा लगने वाला है। तो मैं जीपीएस बन्द कर देती हूँ। मूंगफली खाते चाँद को देखती हूँ।अभिज्ञान जब बाइक पर पापा के साथ जाते हैं उसे बड़ा अचरज होता है कि ये मेरे साथ साथ बोरोवली से बड़ी पीसी के घर मलाड कैसे आ गया। अंशुमन चांद को देख कर गाना गाते हैं – चंदा मामा दूर के पुए पकाये गूड के आप खाएं थाली में अंशु को दें प्याली में। बेटा वो चाँद है , उनसे रश्क न करो , उसे देखो बस, हो कोई बात तो बोल दो वहाँ कोई रहता नहीं तो बात कहीं जाएगी नहीं सब रफा दफा हो जाता है ।
इतने में चाँद ने पूछ दिया की बताओ मैं तेज़ घूम रहा हूँ या ये नीली कर मुझसे तेज़ जा रही है? मैंने तस्वीर दो बार देखी बोली मामू छोड़ो न क्यों पंगा लेते हो आदमी की कार है ज्यादा सटक गयी तो तुम्हारे इधर भी रेड लाइट लगा जाएगा फिर करते रहना इत्मीनान। वो चुप हो गये मुस्कराने लगे बोले घर जल्दी जाया करो । मैं तुम्हे देखता तो हूँ पर मेरे हाथ पैर नहीं होते वो बस तुम्हे मिले हैं । मैं बोली की बस क्या अब आप भी। फिर हँसने लगे चाँद । इतने में घर आ गया और बाकी बातें कल के स्क्रम बोर्ड(srum board) के लिए दर्ज हो गयीं।

देशभक्ति नहीं है यह

देशभक्ति की आड़ में रोज़गार/बेरोज़गार युवा पुरूष एवं महिला ऑनलाइन टाइम-पास करने की बजाय और कुछ नहीं कर रहे ।

जो भारतीय चुप चाप अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को ईमानदारी से निभा रहे हैं वही देश की प्रगति में हिस्सेदारी दे रहे हैं।

अगर भारत में ऐसी स्थिति है कि लोग हँस बोल के रचनात्मक और पारिवारिक आम जीवन व्यतीत कर रहे हैं तो यह सुख और सैनिक सफलता की बात है। यह वाकई ज़रूरी नहीं की डिस्पले पिक बदलना , कैंडल मार्च करना और शोकाकुल रहना ही देशभक्ति होगी।

जब देश व्यथित हो उस समय भी अगर आपके पास अपने बच्चे को कहानियाँ सुनाने उसके साथ नाचने गाने का दिल है तो भी आप देशभक्त है क्योंकि आप भविष्य में एक सन्तुलित नागरिक देने की प्रकिया में हैं। अपना कर्म, रोजमर्रा का जीवन, घर के बच्चे व ज़िम्मेदरियों को धकेल के ऑनलाइन गुबार निकालने से देशभक्ति तो साबित नहीं ही होगी , साथ ही देश के देश के भविष्य में भी रोड़ा बनेंगे ऐसे भारतीय ।

आज कितना सुसुप्त भारत है। अधिकतर युवा ओनलाइन टुटपूंजिये हो कर रह गए हैं।

यही आज के भारत को खोखला कर रहा है। कितना बड़ा जन समूह केवल गलत भाषा प्रयोग करने में अपनी ऊर्जा क्षीण कर रहा है।

आज शहादत हुई है

बयालीस सुंदर और प्यारे परिवार
लूट लिए अलगाव वादियों ने,
एकदेश के नाम
आज शहादत हुई है।

घाटी में आज फिर
नया आँकड़ा पार हुआ है
आज शहादत हुई है।

चैनल वाले
सबसे पहले, सबसे पहले
हाँक रहै हैं बाँट रहे हैं दृश्य
विचलित करेंगे ये चित्र की वार्निंग साट कर
क्योंकि आज शहादत हुई है।

चीथड़ों की तस्वीर,
देशभक्ति के नाम पर
नमन और दुखद क्रॉप कर
साझा हो गयी
दिखाओ-दिखाओ ,
देखो बस हाथ दिख रहा है
ओहो ज़रा मुझे भी बताओ
मीडिया को अब आदत हुई है
आज शहादत हुई है।

उम्मीद है एक और शहादत काम आए
कभी तो मौत के सौदागर घाटे में जाएं!

जिन्हें फर्क पड़ गया
वे सिसक के जीते रहेंगे
जो कुछ कर सकते हैं
वे दिनों दिन तर्क करेंगे।
कौन जाने कौन है
और क्या बात दफन करेंगे
घाटी में कफ़न करेंगे।

होगा रुट कॉज़ एनालिसिस
फाइलों में दर्ज होंगे तथ्य
चोरी होगी आग लगेगी
कुछ नामों के निकल जाने पर
स्टेक्स बहुत हाई हैं
पर फिर आज शहादत हुई है।

बहुत जानें जाएंगी,
कुछ इतिहास ज़िम्मेदार कहलायेगा,
कुछ सरकारें राजनीति कर जाएंगी
थोड़ा बढ़ रहा है ,
गहरा रहा है
अंधेरा
घड़ी में तीन बजे हैं,
पता नहीं
घाटी की सुबह कब आएगी!

देश के वीर जवानों की शहादत को मैं इन शब्दों से नमन करती हूँ। फ्लाइट प्रैक्टिस में मरते जवान, यात्रा करते मरते जवान , घटिया उपकरण के चलते मरते जवान, बचाव कार्य में मरते जवान। ये फौलाद की दीवार बहुत मुश्किल तैयार होती है। इसे यूँ ही नहीं गिरने देना चाहिए।
संसाधन का सही उपयोग सही जगह होना चाहिए । जिनके जीने से फर्क नहीं पड़ रहा वो जेड सेक्युरिटी में बुलेट प्रूफ में हैं और जिनके कारण पूरा देश अपनी होली दीवाली मना रहा है उनकी दूसरी सबह का ठिकाना नहीं।

विचार मेरे अपने हैं किसी से प्रभावित या सलाह मशविरा कर के नहीं लिखे गए।

#प्रज्ञा 14 फरवरी 2019
#पुलवामा #कश्मीर #martyr #kashmir #tribute

वैलेंटाइन पर ख़ुसरो की पीरी को याद किया

आज रंग है माँ
आज रंग है।

किसी में है कोई खुशनुमायी
किसी में है कोई दिलरुबाई
मगर ब-ओ-साफ़-ए-किब्रिआयी
सनम सरापा तुम्ही को देखा।

मैं तो ऐसो रंग और नहीं देखी
सखी री महबूबे इलाही
ऐसो रंग नहीं देखी

मैं तो ऐसो रंग और नहीं देखी
सखी री महबूबे इलाही
ऐसो रंग नहीं देखी।

#ख़ुसरो #दस्तानगोअंकित #वैलेन्टाईनसन्देश

पानीपत का म्यूज़ियम केवल इतिहास की जानकारी रहे

समाचार देखने के दौरान मैंने सुना की पानीपत का वार मेमोरियल म्यूजियम इसलिए बनाया जा रहा है ताकी ये याद रखा जा सके की उन लड़ाईयों में योद्धाओं ने भारत को कैसे एक किया।

शिलान्यास भाषण में बात इस तरह रखी गयी जैसे इन लड़ाईयों से देश को लाभ हुआ हो, जो की बिल्कुल सच नहीं है। पानीपत की तीसरी लड़ाई में हम एक भारत का सपना अब्दाली के हाथ हार गए थे और फिर हार गए अगले दो सौ साल।

नए संग्रहालय की शिलान्यास तक की बात अच्छी है, इतिहास जानना चाहिए, पर इससे राजनीतिक मंच में लाभ उठाने की सोचना अच्छी बात नहीं होगी क्योंकि इसकी यादें दुखद हैं।

इन तीनों लड़ाईयों का अंतिम परिणाम अंगेज़ों का शासन हो गया और अंग्रेज़ी शासन का परिणाम भारत का विघटन।जो की देश की जेनरेशनस के लिए अब तक हेडेक बना हुआ है।

1526 में राणा सांगा ने खुद बाबर को न्योता दिया की आइये मदद करिये मुझे इब्राहिम लोदी से लड़ना है। बाबर ने चाल बदल दी और परिणाम यह हुआ की नई तोपों के साथ मुग़ल सल्तनत स्थापित हो गया।

बीच में हुमायूँ को हरा कर शेर शाह सूरी आये।

1556 में 30 साल बाद जब अकबर चौदह वर्ष के थे तब उनके सेनापति ने राजा हेमचंद्र विक्रमादित्य को हराया दोबारा अकबर का राज्य पूरी तरह स्थापित हुआ।

1761 में मुग़ल शासक, अन्य क्षेत्रीय राजा कमज़ोर थे और मराठा मज़बूत। तो एक बार फिर काबुल से आये लुटेरे और आक्रमणकारी अहमद शाह अब्दाली की मदद लेकर क्षेत्रीय राजाओं और मुगलों ने मराठा को हरा दिया और परिणाम भारत की लूट खसोट हुई। 1761 के दौरान ही होल्कर और सिंधिया और अन्य मराठा गुटों के बीच वर्चस्व को लेकर फुट पड़ चुकी थी ।अब, अब्दाली , पूरे भारत को, मुगल को, मराठों को औऱ कमज़ोर कर गए। अब कोई मज़बूत शासन एक छत्र बचा नहीं और अंग्रेज़ अपनी चाल चल गए।

उम्मीद है एक स्टेट ऑफ द आर्ट संग्रहालय इतिहास से रूबरू कराने के लिए और मराठा योगदान के लिए ज्यादा पॉपुलर हो और इसका कोई दूसरा तीसरा राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश न हो । इतिहास ज़रूरी है जानना , भविष्य के घटना क्रम को समझने के लिए।

राय मेरी अपनी है।

बयान(Communicate)

बयान(Communicate)

बयान करने की ताकत
आदमी के होने के बाद
सबसे बड़ी ताकत होती है
बयान करते रहना चाहिए।

कहानियाँ, ज़िंदगियाँ बयान करने से बनती है
रवानियां, कहानियाँ बयान करने से मिलती हैं
और बयान न करने वालों की
कहानियाँ ही हवा हो जाती है।

अजी इतना ही नहीं
कुलबुलाये निकलने की छटपटाहट में
कहानियाँ कभी तो
दरवाजे की मोजड़ी बन जाती है
तो कभी खूँटी पर का कुर्ता
बयान न करने वालों की तो
हो जाती हैं कहानियाँ लापता ।

#रामकथा #अंकितचड्ढा #रामानुजन #लोककथा