तेरा मेरा सच

इधर नींद खुली और
दरीचे पर चाँद था
मेरी तरफ़।
उधर आँख खुली और
साथ जगा सूरज
तुम्हारी तरफ।

हमारी घड़ियों में
बज रहे होंगे
बोरीवली के
छह बजकर तीस मिनट।

यह सारा घटनाक्रम
दो छोरों पर
एक ही समय में
घटित होता है
एक मेरा सच होता है
एक तुम्हारा सच होता है।

Pragya Mishra

तस्वीर साभार : Alok Ranjan

परमोसन

प्रेम की अभिव्यक्ति बड़ी कठिन होती है।गुस्साना,चिल्लाना धकेल देना कितना सरल होता है। दुलारने और पुचकारने पर ” देखो कैसे तो नाटक कर रही है ” की दृष्टि से देखते हैं। क्रोध को इज्जत दी जाती है। इसलिए हमारे आस पास फटकार को सम्मानजनक माना जाता है और प्यार को टाइमपास हरकत मानते हैं।

नरमी रखने वाला व्यक्ति भीरू है। वह लल्लू है उसे समय की समझ नहीं। कन्नी काटकर उल्लू सीधा कर जाने वाले स्मार्ट और सापेक्षिक (रिलेवेंट) हो जाते हैं।

‘अ’ सामने ‘अ” जैसी बात करो। ‘ब’ के सामने ‘ब’ जैसी बात करो। ‘स’ और ‘द’ से बात ही मत करो। वे दिमाग लगा रहे हैं! वे तुम्हारा वक्त बर्बाद कर देंगे। तुमको नए तरकीब (आइडियाज) दे देंगे और तुम एक पैटर्न पर काम निपटाने की बजाय सुधार करने लगोगे। कितना समय देना होगा, कितनी मेहनत बढ़ा देंगे। देखो यह रहा डिब्बा इसके बाहर नहीं सोचते।

मत सोचो की सामने वाला इंसान है।

सोचो कि उसका गला दबाना तुम्हारा टारगेट और

उसकी साँस घुटना तुम्हारा प्रोमोशन

चाहिए या नहीं चाहिए प्रमोशन ?

चाहिए ना!

तो फिर लगाओ ज़ोर !

तुम नहीं तो कोई और!

From Kuku FM – A Letter of Appreciation

वित्तीय वर्ष समाप्त हो रहा है। इस साल की एक और उपलब्धि यह सम्मान पत्र है।

It takes someone who is innately talented to present a versatile collection of audio shows and podcasts to engage the audience. And Pragnya Mishra does the job very well!

दर्शकों को बांधे रखने वाले बेमिसाल ऑडियो शोज़ और पॉडकास्ट बनाने के लिए एक बेहद प्रतिभाशाली व्यक्ति की ज़रूरत होती है. और प्रदन्‍या मिश्रा इस काम को करने में माहिर हैं!

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बतौर व्याख्याता एक महाविद्यालय में

कांदीवली ठाकुर महाविद्यालय विज्ञान और वाणिज्य में हिंदी साहित्य परिषद के वार्षिक कार्यक्रम में बतौर व्याख्याता बुलाया गया था।

विषय था “आधुनिक जीवन में हिंदी की प्रासंगिकता”।

विज्ञान के बच्चों के बीच बोले, लगभग हम पढ़ा ही रहे थे, हमको भी खूब अच्छा लगा, बोर्ड पे चॉक से लिखने में ।

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“बोलते शतदल” – YourQuote पब्लिशिंग के ज़रिए मेरी किताब

Agile footprint के दौर में अपने आप को थोड़ा-थोड़ा और निरन्तर प्रस्तुत करना होता है , इसलिए हम कभी ब्लॉग लिखते हैं, कभी फेसबुक पर कविता, कभी योरकोट पर क्षणिकाएँ, तो कभी कुकू पर पॉडकास्ट।
जिसके टैलेंट में साधना का बैकअप है वे हिट होंगे, और प्रयासरत रहना साधना में रहना है। इसमें ईमानदारी से लिखना एक ज़रूरी मील का पत्थर है लेकिन ये भी है कि मसाला नहीं होगा तो मैगी स्वादिष्ट नहीं लगेगी।

योरकोट पर मेरी मम्मी सरोज स्मृति को याद करते हुए मैंने यूँ ही क्षणिकाएँ लिखी थीं, रात को अक्सर सोने से पहले उन्हें एक सिरे से पढ़ना अच्छा लगता था, लेकिन मोबाइल सोते हुए बच्चों के बगल में रखना ठीक बात नहीं है और अपने भी शरीर से इतना लगा के नहीं रखना चाहिए । इसके लिए योरकोट ने कहा की इनको छपवा लो।

ऐसे में अपने अड़तालीस कोट्स की पूरी किताब के साथ थोड़ा थोड़ा प्रस्तुत हो रहीं हूँ । माध्यम है योरकोट। ये सिरहाने रख के पढ़ने के लिये। आप भी पढ़ियेगा , माँएं जो देह सहित बेटियों के पास नहीं होती वो आजीवन उनके विचारों में घर कर जाती हैं।

एक बेटी को उसकी माँ की ज़रूरत आजीवन होती है कयोंकि कोई पुरूष न पिता वैसे गले लगा कर जी हल्का कर पाएंगे कभी जैसे गले लगाती है माँ।

किताबें सिलसिलेवार प्रकाशन से छप कर आनी चाहिए , आयेंगी भी ।
लेकिन गले लगा कर एक ऐल्बम रखनी हो तो इसमें देर कैसी , उस समय मेरे पास कैमरा नहीं था आज कलम तो है। यही सही।

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नींद

नींद सुखद अवस्था है,अपने आप से प्यार करते हैं वे जो लेते हैं अच्छी नींद। शरीर के तंत्र सभी लाइन पे लाती है रोज़ पूरी होती नींद। बहुत ज़रूरी नींद।

सपनो की दुनिया है नींद, सपने होंगे पूरे जब देखे जाएंगे, खुली आँखों की जलन और सूखता कॉर्निया सबसे निजात है नींद, नहीं आते सपने आराम कुर्सी पर, हमें सर के नीचे हाथ रख कर लेटे रहना है, लम्बे होकर बिस्तर पर पसार टाँगें। बेहद आराम की तलब के साथ देखने हैं अपने सपने। सपनों के बीज बोती नींद।

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माँ

प्रचलन से इतर अनुभूति के शब्दों में क्या लिखूँ?
तुम्हारी याद में मम्मी लिखूँ या माँ लिखूँ ?

रीमा का बेटा उसे माँ कहता है
सुनने में बड़ा अच्छा लगता है
मेरे बच्चे लिपटेंगे बोलकर मम्मी-मम्मी
यह मेरा सच है ये मुझे सुख देता है।

अपने आप में पूरे ब्रह्मांड की ऊर्जा का स्त्रोत है ये एक शब्द “माँ।

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