धीरे धीरे चाय घुल गई
खड़ी चम्मच की चीनी में
होठ चप चप से
सिल गए
आगे बढ़ने की राजनीति में
हाइवे के किनारे खाट लगी है
बच्ची ठुड्डी हथेलियों पे गड़ाए
तकिए पर टिकी सी
लेटी हुई
छुक छुक चलता ट्रैफिक देख रही है
उठूं या लेटी रहूं
वैसे भी मैं सिर्फ सात साल की हूँ
मेट्रो जब शायद बन जाये
तो उठना होगा
उसमे चढ़ने के लिए
अभी ये मिट्टी हटानी है
मेट्रो के बनने के लिए।

#प्रज्ञा 2 अप्रैल 2018