लवग्राम

फिर उस प्यार की तलाश
हमेशा थी मुझे
जिसके बारे में
सुना-पढ़ा करते थे
जिसमें ,
कुछ अच्छा नहीं लगता,
कहीं मन नहीं लगता!
बड़ी दिक्कतें आती है
थोड़ा रिस्क होता है!

कोई देख ले तो हड़बड़ाहट,
सुन ले तो घबराहट ,
जान ले तो पसीना!
पूछ दे तो हकलाहट।

धक्क से बैठ जाना,
खयालों में गुल
नमक दो दफा डाल आना!

जाने के बाद भूल जाना की
आये क्यों थे?
और किसी को बुला कर,
उससे ही पूछ बैठना की
तुमको बुलाए क्यों थे?

और भी बहुत कुछ का होना
जो सुनने में आता था,
मगर होता तो नहीं था।
कान कान में बात होती होगी,
कोई बताता तो नहीं था।

तो क्या सच था जो पढ़ते थे,
सोलह की उम्र में मुस्कराते हुए
जो हुआ है बत्तीस में,
गालों को हथेलियों पे टिकाते हुए।

ऐसा कुछ हुआ था
तो नलिनी ने आंखें बंद कर ली
कि उम्र है,
जो पड़ाव है,
देखा जाएगा
प्यार कर के!
जो समाज है,
जो रिवाज है,
देखा जाएगा
प्यार कर के!

अभी जी तो लें
देख तो लें कि
ऐसा वाला अहसास
होता क्या है?
कोई आप में खोता है
तो फिर होता क्या है?
नलिनी और राजीव
की लव स्टोरी के जैसे
पता तो चले
प्यार में बेचैन होना
होता क्या है?

#प्रज्ञा 9.30PM , मुम्बई , 9 अप्रैल 2018

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Image courtsey -Kunal Patil

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