गठबन्धन

शादी एक अद्भुत रिश्ता है
हाथ पकड़ किये वादों
के पहले मन का मिलन
प्रमुख होता है
कई संकेत आते हैं
की आप हमको भातें है
पेट की गुदगुदी
मुस्कराती है
बात फोन तक आती है
सिलसिलेवार अंजाम में
आज वो दिन आएगा
तुम उसकी और वो
तुम्हारा हो जाएगा
नए सफर की उमंग में
मन धुन कोई गुनगुनायेगा
“कैसे मुझे तुम मिल गयी”
देख तेरे लिए कोई रोज़ गायेगा।

#आपकीफरमाइश #प्रज्ञा 24 अप्रैल 2018

पाजेब

पाजेब
मैं कितना भी व्यस्त रहूँ
तुम्हारी पाजेब
मुझे खींच ही लेती है
छन छन करती हुई
तुम यूंही कितनी बार
आती हो
जाती हो
मैं कलम माथे पे टिका
कभी नीचे देखता हूँ
कभी तुमको देखता हूँ
तरबतर सराबोर
सारा दिन
कितने काम हैं तुम्हें
चैन धरो
बिछिया निकल गयी दौड़ते
कुकर की सीटी पर
चट झुकी ठीक किया
चली आईं
तुम इधर बोलते,
खाना हो गया
आ जाईये।
लट सम्भाली
घुंघरू उकेरे,
चलते कैसे
टेढ़े से देख रहे मुझको,
तुम्हारी आहट के
इतने पास
रहते हैं पाजेब
जैसे तुम्हारी तस्वीर और मेरी जेब।

तुम्हारे पांव मैंने देखे पायल देखी बिछिया देखे सोचा छूने से टूट जाओगी या जला जाओगी कैसे कहूँ कैसे देखे !

#प्रज्ञा 24 अप्रैल #आपकीफ़रमार्ईश

आज क्या विचार है

मैं जहां रहूंगी वहाँ क्या मिलेगा
डायरी मिलेगी
याद का पन्ना मिलेगा
और पीने का पानी।
एक एक घूँट पर
मस्तिष्क से तितली उड़ेगी
खाबों का पुलिंदा बनेगा
धागा धागा रेशम बुनती
नींद लिपट जाएगी
बैंगनी साटिन की सलवटों से।

#प्रज्ञा

#randomThoughts #pragya #24April