पता नहीं मुझे क्यों लग रहा था कि
ये खुद ही ठीक हो जाएगा
और एक बस लौंग भर
से रात भर में कुछ जादू हो आएगा।

मैं बहुत काबिल हूँ
मुझे सब आता है
टूथ पिक उठायी
पूरा ऑपरेट कर डाला!
ये सब बस आयी गयी बात है
अभी देखना दर्द ठीक हो जाता है।

ढोते ढोते जबड़ा सूजने को आया
होठ सिलने लगे और स्टाइल में

छोटा सा कौर
मूँह में ठूंसने को आया।

सुबह बात हुई पिता जी से
बोले अरे बुड़बक कुछ नही है
टीसे बत्तीस में चौ आता है
पल्साटीला ले लो देखो
दर्द कैसे छू मंतर हो जाता है।

तभी एक शुभ चिंतक बोले
ओ आंटी जा ब्रूफेन लेले।

पर मैं बहुत काबिल हूँ
मुझे तो सब समझ आता है
जाते हैं ऑफिस
ये बस दर्द ही तो है
ये तो आता जाता है!

लेकिन बात तक
जब न निकलने को आई
सिद्धेश्वरी को मुझपे दया आई
बोली तू आज क्यूं ऐसी
हालत में आफिस आयी?
छुट्टी ले जा कोई खाने
का टुकड़ा है
विज़डम टूथ में तेरे अड़ा है
अब जबड़ा सूजा है
फिर कान दुखेंगे
डेंटिस्ट की खबड़ धबड़
हालत खस्ता कर देंगे
तो कौन ही तेरा काम करेगा
वैसे भी इस हालत में
तू लेस प्रोडक्टिव होगी बच्चा
जा जा अभी के अभी घर जा।

छोड़ छाड़ के सारे काम
चली प्रज्ञा डेंटिस्ट के धाम
डॉ रेड्डीज और डिक्लोफेनेक
वाला कोई नही ऐसा
स्टोलीन की शक्ति जैसा
दर्द को दिया तपाक आराम
टाल मटोल के चक्कर में
अपने ही सर फटता दाम।

#प्रज्ञा मई 2018