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जनहित में जारी

फ़ासलों में मोहब्बत बढ़ती भी है,
ख्याल में फिर फिर मिलना होता है
दिमाग बिना रेंट ले लेते हैं
बिन बताए सपनों में आना जाना होता है।
कितने करीने से तुम मेज़ रख लो
यादों को बेबाक पसर जाना होता है
दर्द इश्क़ में दर्द नहीं होता सनम
उफ़्फ़ से शायरी का माहौल बनाना होता है
डील डौल का गबरू ही सही
दिल थोड़ा नाज़ुक सा हो जाता है
मुस्कराहट चेहरे की आम बात बन जाती है
हर गाने से अपना हाल बताना होता है,
और ध्यान रहे!
स्टीयरिंग घुमाते हुए खुद को
हकीकत में लाना होता है।”