No one like you

True that ,
No one ,
Yet
one lucky life time
it does take,
to meet one ,
someone ,
Is he the one?
Is she the one?
May be not.
Why not?

Can we take a chance!
Trust the flow
You are yet to romance !
Tune in…
Will you ?
Okay let’s dance!
Is it Salsa or Rumbo
Why you drink dumbo!
I thought I was seeing you .
Is this Brazil or France?
This is life.
Is it ?
A real thing called life.
Yes.

Then let it ripe.
Utill when?
Let the show begin
Shall I mute it till then..
Ok! No listen..
What?
and Who is talking then
You and me
Till when?
Untill its dawn.

#Pragya

अतृप्त

मैं मनुष्य,औरत,पुरुष
जो भी रहूँ,
मेरे अंदर मेरी आत्मा के
अलावा कुछ और लोग
भी रहते हैं ,या वो
यात्रा के दौरान
एडजस्ट हो चुके हैं।
मुझे पता नहीं चलता
वो बिना टिकट,
ऐसे ज़रा सा बगल में
आकर खड़े होते गए।
मैंनेे कनपटी पे बाल समेटे
नज़र उठा कर उनको देखा।
केहुनी गड़ी थी ।
शुरआत असहज थी।
मैं बहुत तेज़ी में रहती हूँ
मेरे पास समय कम होता है
इसलिए ये थोड़ी सी
असहजता को
पर्स में फेंक बस चेन कसना होता है।
थोड़ी जगह बना ली
साथ बैठने के लिये
अब ये लोग दावा
करते हैं कि वो मैं हूँ ,नहीं मैं वो हूँ।

बहरहाल मुकदमा
दायर है
तनाव की अदालत में
केस चलेगा
लंबा चलेगा
मेरी तारीख आने तक
फिर मुजरिम
मल्टीप्ल पर्सनालिटी डिसऑर्डर
के तहत बरी कर दिया जाएगा।

तुम समझ नहीं रही हो।
ये लोग सामाजिक हैं,
इसलिए तुम्हारे अंदर इनकी जगह मौजूद है।
अपनी असामाजिकता पहचानो!
खुद से लड़ना बन्द करो!
ये लोग बाहर आएंगे
ये अलग अलग लोग हैं।

तुम्हारे अंदर मिलने वाले
ऑफिस के लोग,
घर के लोग,
ट्रेन बस शेयर टैक्सी
और अनदेखी दुनिया में
मोबाइल से आये लोग,
हाइपर सिटी के और
देहाती मिट्टी के लोग,
छोटा शहर, मिड टियर
मेट्रो में बसते लोग।

ये सब मिलाकर जो
तुम बना है उसमें
अहंकारों का कॉकटेल घाना है।

“जवाब दूंगी जब मुझसे
पूछने आएंगे”
“हम साल भर से दो गली दूर
पर तब जाऊंगी जब वो बुलाएंगे”
“वो हमारे लिए क्या लाये थे
हम उन्हें क्या देके आये थे”
“ये वाला इन साहब के लिए रखो
इन्होंने हमें फायदे कराए थे”
“उसका तीन महीने का बच्चा गिर गया
हम क्या करें ?क्यों मिलें क्यों जाएं
हमारे घर लड़की हुई
तब क्या वो मिलने आयेे?
“बस और दलील नहीं दोगी
तुम तजुर्बे में मुझसे कम रहोगी।”
“मैं तुम्हें बताती हूँ
इसे बस ऐसे करते हैं।”
“रचनात्मकता मत जनाओ
हम एक ढर्रा फॉलो करते हैं।”
“हम छोटे शहरों से हैं
बस इंजीनयरिंग या मेडिकल करते हैं।”
“मैंने दुनियादारी देखी है
तुम्हारा कदम चान्स होगा और
हमारी नौ से पाँच की ज़िंदगी में
ही खुशियों का घर लॉन्च होगा।”

तू तो बहुत काबिल,
अच्छे नम्बर वाला
लीडर, कम्पनियों में साख !
फिर मन क्यों खोखला है?

कभी दिल के दौरे ले आया,
कभी सुसाइड करने चला है!
इन सब लोगों को इकट्ठा करके
तेरी आत्मा को क्या मिला है?

4 मार्च 2019,सोमवार , मुम्बई