कैसा होता

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आज टाइम लाइन पर एक पोस्ट आया जिसमें तस्वीर में एक किताब थी , और लिखा था :

आपको अगर एक ऐसी जादुई किताब मिले जिसमें कुछ भी लिखने पर बात सच हो जाये तो पहली चीज़ आप क्या लिखेंगे ?

तो मेरे दिल में आया तुम “जय किसान” लिख दो क्योंकि उनकी आत्महत्या और मजदूर हो जाने पर तुम बहुत बेबस महससू करती हो।

#कैसाहोता

मैं ये लिखती की बता मेरी जादूई किताब कैसा होता
मेरे देश का पहला प्रधान मंत्री अगर बोस होता
तो मेरा देश कैसा होता?
कैसा होता अगर भारत -पाकिस्तान कभी बंटा न होता
अगर महात्मा, भगत सिंह के पक्षधर होते
और जो कोई काबिल जनाए गए
उनके मन बस सत्ता भर न होते
तो बता मेरे मुल्क के सूरते हाल आज कैसे होते?

कैसा होता आज का भारत
अगर देश के दिन अंग्रेजों
के दो सौ साल के पालने में ज़ाया न होता?
बता मेरी जादूई किताब मेरा देश कैसा होता?

ये सब सपना एक ही बात है
एक ही झटके में नज़र आता है
क्योंकि जब भी मेरे देश का किसान
मज़दूर हो कर आत्महत्या को जाता है
मुझे मेरे मस्तिष्क की केंद्र बिंदू से लेकर
रक्त धमनियों तक भारत के
कुचक्र ब्यूरोक्रेटिक लाल फीताशाही की
नस्ल तक आने का इतिहास नाच जाता है
इतना बेबस आम आदमी सा मन ही क्यो होता है?
दिखा न ऐ मेरी जादुई किताब
वैसा होता तो मेरा आज कैसा दिखता है?
मैं ये नही कहती कि वर्तमान के लिये
अतीत ज़िम्मेदार है रोना रोउंगी मैं,
नहीं कभी नहीं मुझे भविष्य से ही सरोकार है
लेकिन जो तू हाथ में आई तो
थोड़ा तिलिस्म हो आया है
जो मेरे हाथ में नहीं उस भूत को
बोतल बन्द करने का मन हो आया है
एक अलग एंगल एक दूसरे नज़रिये
को तेरे पन्नों पर देखने का दिल हो आया है
दिल हो आया है इस शोध पर उतरने का कि
यूँ तो शरीर को आज़ादी मिल गयी
पर जी हुजूरी तो मेरे डी एन ए में रच बस गयी
क्या मेरे दिमाग का विकास कुछ और ही उन्मुक्त होता?
बता न एक मनुष्य की तरह मेरा विकास कैसा होता
जो अगर मेरे देश को सोने की चिड़ियाँ बन कर ही
बढ़ने दिया गया होता?
बता न जादुई किताब इतिहास का दूसरा पहलू
कैसा होता?

#प्रज्ञा 30 जून 2018