गौरैया फुदकती है – बाल कविता

गौरैया फुदकती है
चुनमुन चिरैया चहकती है
धीरे धीरे दाना डालो
सुबह सुबह क्यों जल्दी है
गौरैया फुदकती है।

कबूतर बनाये घोंसला
ले तिनके का हौंसला
चोंच दबाए उड़ते है,
डक्ट में चौकस रहते हैं,
स्लेटी पंख लाल आँखें
देखो कैसे अकचक ताकें
वहाँ दो बच्चे बैठकर
खाना मांगे चोंच पर
बच्चा खाये कौर कौर
मम्मी पूछे बेटा और?

गौरैया फुदकती है
चुनमुन चिरैया चहकती है
धीरे धीरे दाना डालो
सुबह सुबह क्यों जल्दी है
गौरैया फुदकती है।

Pragya Mishra

– 26 अगस्त की शाम अंशुमन को ट्राई साइकल की सवारी कराते कराते जो हम दोनों देखते गए उसे मैं बोलती गयी और ये सुनते सुनते अंशुमन ने सोसायटी के राउंड्स लिये।

4 thoughts on “गौरैया फुदकती है – बाल कविता

  1. Maa ki baat hi nirali …….dharti par jaddojahad karti chun chunkar daane laakar apne bachche ko palti……pataa nahi kab insaanon ki shikaar ban jaaye…….hinsak jaanwaron se jyaada insaanon se darti………..shaayad chhoti hai chhotaa pet hai khaanaa bhi kam khaati hogi ….isiliye….shayad bhukh jaldi lag jaataa hogaa……tabhi to bhukh se ladne jaldi aa jaati hogi………..khubsurat kavita.

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  2. मुझे अपने छुटकपन की याद आ गई । जब हम सुबह-सुबह जल्दी-जल्दी खाना खाकर स्कूल के लिए निकलते थे तो मम्मी रोककर कहतीं थी कि “क्या हुआ थोड़ी देर से ही पहुँचेगा ना, खाना आराम से कहा।”

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