साबूदाना खीर

तब मेरे पास स्मार्ट फोन नहीं था, किसी के पास नहीं था। कैमरा कोडक का था। जिसमें रील तब ही भरते थे जब कहीं बाहर जाते थे या किसी का जन्मदिन , कोई अन्य पार्टी होती थी। डिजिकैम भी दादी माँ के रहते आ गया था। लेकिन हमारे पास नहीं आया था ।मैंने सोचा भी नहीं कभी । वो कोई कमी थोड़े थी।

मैं तो गहना बेटा थी, दादी माँ फटाफट बाड़ी से जाकर भिंडी तोड़ती थी, चट से कड़ाही में भूज कर गरम रोटी के साथ देती थी। भिंडी पकी भी रहती थी, हरी भी रहती थी। किसी को दिखा नहीं सकती रेटिना में है, निकालने की तकनीक डेवेलप होगी तो देखूंगी।

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