अंशुमन बोलना सीख रहे हैं, समय के साथ मैं ये भूल जाऊंगी की उन्होंने कौन से शब्द को कैसे बोलना शुरू किया इसलिए ये जरूरी है कि इस प्यारी याद को मैं लिख कर स्थायी कर दूँ। बोली कि तस्वीर नहीं ले सकते उसको रिकॉर्ड कर सकते हैं लेकिन रिकॉर्ड करने जाती हूँ तो अंशुमन मोबाइल पकड़ के टच की काबिलियत सीखने लगता है।

अंशुमन ने सबसे पहले क्या शब्द बोला होगा मुझे याद नहीं है, लेकिन “बाउजी ” ,”बाउजी” और “डे डो मुज़,मुज़े डे डो” उसके सबसे पहले कहे जाने वाले शब्दों में कह सकते हैं।
अब डेढ़ साल की उम्र में वो कमोबेश काफी कुछ समझा ले रहा है।
डब्बा – बाडा
ढक्कन – बड्डन
खोलिए – खोली
चलिए – चली
पानी – मम, अब पानी, हमने उसकी केअर टेकर को मना किया मम बोलने।
टॉफी – टोकिक
सीता राम – सीटा ताम
तौलिया – तोली
पोछो – पोछि
जूता – तुटा
मोबाइल – पोन
पापा – पापा
मम्मी – ममी
दादा – दादा जी
दादी – दादी
नाना – नाना
नानी – नानी
मोनू – मोनू लेकिन मोनू ने बड़ी स्थिरता से भैया बुलवा के दम लिया तो अब मोनू बैया या भया बोल देता है, लेकिन मौका लगते से कान में मोनू बोल कर भैया को चिढ़ाता है।
सायकल – टायकल
नमकीन – तिक्खा
रोटी – टोटी
चाहिए – चिये
केला /बनाना – टेला/ बनाना
बिल्ली – बिल्ली/म्याऊँ
कोई भी किताब – अब बुक हैं पहले म्याउँ थी क्योकि सी फ़ॉर कैट है किताब में।
इसके अलावा वो जॉनी जॉनी यस पापा ईटिंग शुगर के बताने के लिए “जोनी पापा तितींग आ आ ” करते है।
मैं एक कविता गाती हूँ:
बिल्ली बोली म्याऊँ म्याऊँ
मुझको हुआ ज़ुकाम
चूहे चाचा चूरन देदो
जल्दी हो आराम।
इसके वो बहुत शान्ति से सुनते हैं और फिर बिल्ली बोलि बिल्ली बोलि म्याऊँ करते रहते हैं।
मैं जब हिकोरी डिकोरी डॉक माउस रैन अप द क्लॉक करती हूँ तो दीवाल घड़ी की तरफ अब खुद देखते हैं।
ट्विंकल ट्विंकल पर हाथ टीम टीम करने के साथ आसमान की तरफ देखने लगे हैं अंशुमन।
दादीमाँ और दादा जी दोनों प्रिंसिपल थे तो हाथ पीछे कर मुयायना करने वाला अंदाज़ अंशुमन ने भी ले लिया है, वैसे ही चले निकलते हैं सोसाइटी की लिफ्ट में ।
बित्ते भर का बच्चा इतनी तेज़ी से बड़ा हो रहा है कि मुझे समझ ही नहीं आ रहा कि।
सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री वॉटरफॉल से आगे बढ़ गयी है।
एजाइल मेथोडोलॉजी में काम करने का ज़माना है, अंशुमन की सीख की अगली किश्त नेक्स्ट स्प्रिन्ट में लिखी जाएगी आज इतना ही पोस्ट करते हैं।

#प्रज्ञा