झपकी कहानी -2

“मम्मी वो प्लूटो से पढ़ो न आज।”

बड़े दिनों बाद हमने सोने से पहले प्लूटो निकाली।
अभिज्ञान को प्लूटो मैगज़ीन की चित्रकारी अच्छी लगती है।उसकी छोटी कवितायें , टू लाइनर्स उसे मज़ेदार लगते हैं।

पाखू और बजरंगी मासूम हैं साथ ही बुद्धिमान भी, उनका तर्क बिल्कुल सही है कि क्यों अपने मन की करने वाला उल्लू कहलाता है।

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