ज़िन्दगी का गरबा

तुम इतनी ऊर्जा कहाँ से लाती हो

तुम्हारे अंदर ऐसा क्या है जो रंग हो जाता है

मैं शहर हो जाता हूँ तुम्हारी याद का

तुम क्या कर देती हो इन मामूली से दिखने वाले

मकान की दीवारों पर जो दिलों में घर कर जाते हैं,

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