बवाल सवाल

मैं सात बजे निकलने वाली थी आफिस से , सोचा रात साढ़े आठ तक घर टच कर जाऊंगी ।थोड़ी देर अभिज्ञान को देख लूँगी नीचे खेलते हुए , उसका दिल रह जायेगा कि मम्मा बैठी थी।

कारगुज़ारी में आठ बजे और मैं साढ़े नौ बजे पहुँची।रास्ते में कॉल आयी , रुँधी आवाज़ में अभिज्ञान बोले , “मम्मी मुझे इस सोसाइटी में नहीं रहना कोई मुझे नहीं खेलाता” शब्द गम्भीर थे।

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