मैं सात बजे निकलने वाली थी आफिस से , सोचा रात साढ़े आठ तक घर टच कर जाऊंगी ।थोड़ी देर अभिज्ञान को देख लूँगी नीचे खेलते हुए , उसका दिल रह जायेगा कि मम्मा बैठी थी।

कारगुज़ारी में आठ बजे और मैं साढ़े नौ बजे पहुँची।रास्ते में कॉल आयी , रुँधी आवाज़ में अभिज्ञान बोले , “मम्मी मुझे इस सोसाइटी में नहीं रहना कोई मुझे नहीं खेलाता” शब्द गम्भीर थे।

पर इस मामले में अभिज्ञान को अपनी मदद चूँकि खुद ही करनी है तो मैंने ज्यादा कुछ सवाल जवाब नहीं किया बस एक आध बात उसने बताई उसको ध्यान से सुना और उसका रोना शांत किया।

आलोक ने तय किया कि हम चारों आइसक्रीम खाने जाएंगे , इससे अभिज्ञान का मूड चेंज हो जाएगा। अभिज्ञान बाबू बड़ी चालाकी से बोले ,” नहीं, मैं पहले मोबाइल में एक वीडीओ देखूंगा फिर बाहर जाऊंगा। तुम नहीं तो आने के बाद वैसे भी पढ़ाने लगोगी।”

मैं उदासी का तुष्टिकरण मोबाइल वीडियो से नहीं होने देना चाहती थी, फिर दिमाग और ज्यादा निर्भर होता जाता है।

हम दोनों ने ऐसे दिखाया कि
“ठीक है, अब क्या जाएं ,तुम्हे तो मोबाइल देखनी है ,रहने दो चेंज करते हैं”, उतने में बात बन गयी। हड़बड़ा के आया और बोला अच्छा ठीक है चलो पर मैं आने के बाद बीस मिनट देखूँगा।

आज बाइक रहने दिया , आलोक ने कार निकाली , अभिज्ञान को उसकी फ़ेवरिट फ्रंट सीट पे बैठ के अच्छा लग रहा था। वीक डे रूटीन से अलग थोड़ा बाहर घूम आना और नचरल्स तक जाना हमें भी अच्छा लग रहा था। अंशू जी भी चपर चपर कर के आइसक्रीम का स्वाद ले रहे थे। अभिज्ञान को कोकोनट फ़्लेवर पसन्द है। मैंने और आलोक ने केसर पिस्ता और सीताफल ट्राई किआ।

इतने में काउंटर पर नाइट ड्रेस में एक मोहतरमा आयीं।अमूमन हम जैसा अंग्रेज़ों से पाई आज़ादी के अंतर्गत खुद को स्मार्ट पढ़ा लिखा व्यक्त करने में करते हैं उन्होंने उसी अंग्रेज़ी में हनुमान नगर के लड़के को जो वहां आइसक्रीम सर्व कर रहा था – इंग्लिश के कल्ट क्लास टोन में कहा- “मेन्यू प्लीज़, व्हाट फ्लेवर्स, आई विल हव काजू किशमिश सीताफल, डब्लस्कूप । नज़ाकत की उंगलियों से कार्ड पेमेंट किया गया।”

लड़का भी पट्टी पढ़ाई अंग्रेज़ी में महिला को जबाव देता है- “श्योर मैम, वील यू हैब इट ओर टेक आवे” बोलता हुआ आज्ञानुसार वहीं परोसने लगता है।

तभी वो महिला जिनकी हवाई चप्पल तक, मुह खोलते से हाई हील में तब्दील हो रही थी असलियत उगल पड़ीं।

“अरे इतना कम क्यों…..डबल स्कूप में सिंगल स्कूप लग रहा है” ।

ऐसी बातें पोलाइट तरीके में इंग्लिश में नहीं कही जाती इसलिए आईटी वालों की ज़्यादा कटती है।

खैर, मैडम हिंदी में भड़की तो उनकी हवाई हाई हील से नज़र हटी और देखा कि अपना बच्चा आइसक्रीम शॉप के कचरे का डब्बा खंगालने वाला हैे। सब नॉर्मल हो गया। बच्चों का मन है बहल गया।

अभिज्ञान खुशी खुशी घर आए, वादे के मुताबिक बीस मिनट की यू ट्यूब वीडियो देखने मिली।अब मूड अच्छा भी था और मज़े में भी थे। जब अभिज्ञान नॉर्मल लेटे होते हैं तो आँख खोल के पँखा देखते देखते पचहत्तर सवालों का तांता लगा रहता है,आज उनके हाथ में लगा मेरा आई कार्ड – अब आगे :

ये क्या है?
आई कार्ड है।

इसमें आगे पीछे दो अलग कार्ड क्यों है?
क्योंकि एक कम्पनी का है और एक प्रेमिसेस में एंटर करने का।

तुम फलाँ कम्पनी में हो?
हाँ मैं फलाँ कम्पनी में हूँ ।

A N D H E R I ये क्या है?
अंधेरी।

-96 क्या है?
400096 इसका मतलब पिन कोड।

तुम अभी इतने साल की हो?
नहीं मैं अभी इतने साल की हूँ।
हां!कब से इतने साल की ही हो?
हां आठ तारीख को उतने साल की हो जाऊंगी।

मम्मी तुम्हारा भी ब्लड ग्रुप O+ है?
हाँ।

O+ve क्या होता है?
खून में a, b दोनों फाइटर(एंटीजन) होते हैं तो खून O+ve होता है, उसे हम A को भी दे सकते हैं और B को भी दे सकते हैं।

हँसते हुए , ‘ C+ भी होता है क्या?” हमारे स्कूल का एक लड़का शारव बोलता है, C+ भी होता है।
नहीं ऐसा नहीं है।

मूड अब हरा हो है। पापा ने एग्जाम के पेपर बना के रेडी कर लिए। अभिज्ञान अब अपने एग्जाम के लिए पेपर सॉल्व कर रहे हैं। ये आज की बातें लिख कर अभिज्ञान को सुना दी है वो खुश है और प्यारा बेटा सिकुड़ के सो रहा है। गुडनाइट।

#प्रज्ञा