आहना का बगीचा

गलीचे सी घास बिछी है,
देखो सूरज चमक रहा है,
छोटा बादल बन के छतरी,
कुछ फूलों को ढंक रहा है,
मैं टिक के बैठी मेरा पेड़,
तू टिक के बैठी तेरा पेड़,
चिंतन में जो पेड़ खड़ा है ,
दो फूलों को देख रहा है।

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