इस तस्वीर में कौन कौन हैं। आइए बाएं से दाएं देखते हैं। मेरे आगे खड़ीं हैं तेजल, फिर मैं, कविता और आखिर में जल्पा । इस तस्वीर में ओझा भाभी भी दूर मुस्कराती दिख रहीं हैं। ये सुन्दर स्त्रियाँ होने के साथ साथ और भी बहुत कुछ हैं।

सबसे पहले बात करते हैं तेजल की। तेजल को आनुवंशिकी गरबा और गुजराती पद्धतियां बड़े नायाब ढंग में मिली है। जिसे वे अपनी लचक और ठुमक से और भी विहंगम बना लेती हैं। इसके साथ ही उनकी ऊर्जा की दाद देनी चाहिए दो बच्चों की माँ हैं। बेटी के आने वाले परीक्षाओं की तैयारी करा रही हैं और साथ ही पूरे दम खम से हर पूजा पाठ तीज-त्योहार में समूचे श्रृंगार के साथ उतरती हैं । तेजल ये सब बैठे बैठे नहीं करती, न ही ये जादू से होता है । उन्होंने अपने जीवन की जिम्मेदारोयाँ स्टाइल से वहन करने के लिए अपने फिज़िकल फिटनेस को नियमित खान पान , प्रतिदिन वैशाली के साथ रात की सैर , योग नियम के माध्यम से पिछले एक वर्ष में बढ़ाया है। तेजल को एक सफल संचालिका होने की बधाई वो खूब ताकत के साथ गरबा सिखा भी देती है। एक दो , एक दो तीन चार , की गिनती पोपट में लाउड म्यूज़िक में भी उनके मुंह से निकल पड़ती है। और अगर आप डंडियाँ में गलत स्ट्रोक मार रहे हैं तो यथावत लहंगे घाघरे में वो टीचर में बदल जाती है। ज़िन्दगी की ह हा ही ही में हम नहीं सोच पाते कि हमारे आस पास कितने असाधारण लोग हैं इसलिए मेरा देश असाधारण है। जिस तरह बुराइयों से युद्ध करने में हर देवता की शक्ति स्त्री का स्वरूप है वैसे ही ये भी अपने घर की उसी स्त्री शक्ति का रूप है। ये सब पढ़ कर वो ज़ोर ज़ोर से हंसते हुए सुनाएगी पढ़ेगी और कहेगी की प्रज्ञा आप कितना सोचते हो। यही तो खासियत है भारतीय महिलाओं की उन्हें पता भी नहीं और उन्हें जानना भी नहीं कि वे ही शक्ति हैं ।

मेरे पीछे खड़ीं हैं कविता। कविता आधुनिक और पारंपरिक का वो समीकरण है जो शायद आज के डेट में दुर्लभ है। एक भारतीय महिला के सारे गुण इनमें सन्तुलित तरीके से मौजूद हैं ,वो कंपनी चला लेने वाली निर्णायक एग्जीक्यूटिव भी हैं । दमदार तेवर , सटीक वक्तव्य , सही गलत की कड़क पहचान , हाँ तो हाँ और ना तो ना। ये कुछ ऐसी विशेषताएं हैं कविता के व्यक्तित्व की जिससे ये अपने निजी जीवन के दोस्तों के साथ और प्रोफेशनल स्तर पर भी एक सी खरी उतरती है और सभी की फेवरेट हो जाती है।
कविता परेशान भी होती है,अपने आप में सवाल जवाब भी करती है, वो खूब मस्ती भी करती है, चंचल भी है, वहीं गम्भीर अच्छे सुझाव भी देती है, बेहद सन्तुलित दोस्त भी है, कभी कभी जो ना सम्भले उसे जाने देती है पर ज़िन्दगी की खूबसूरती को हाथ से जाने नहीं देती उसे करीने से दीवाली की सफाई की तरह हर दिन धूल न जमने पाए की बॉडी लैंग्वेज के साथ जीती है।
मुखर आत्मविश्वास इतना जिसे देख कर एक गाँव की सीधी सादी कम पढ़ी लिखी महिला उनके सामने मुँह खोलने में भी सकुचाती रहे लेकिन पेशेंस ऐसा की वो कमतर औरतों को भी बढियाँ सिखा कर ऊपर उठाने का दम रखती है। उसने ऐसा किया भी है।
एक बार फिर ये सब ऐसे नहीं होता , शक्ति संचित करनी पड़ती है उसका उपयोग करने के लिए , इतना सब सम्भालने के लिए कविता का मॉर्निंग वॉक पैटर्न टस से मस नहीं होता न ही विटामिन डी के सेवन की नियमितता गड़बड़ाती है। खुद की फिटनेस पर ध्यान देते हुए घर परिवार की देखभाल करने का अच्छा उदाहरण कविता है।

कविता के पीछे है जल्पा , बेहद खूबसूरत , सौम्य , शालीन , ग्रुप में थोड़ी थोड़ी चंचल , सुलझी हुई , बेहद बुद्धिमान जिसकी हूबहू झलक उनकी बेटी झील की प्रतिदिन की सफलता में दिखती है।
ये सीधी सादी चश्मे के पीछे छुपी सी ए महिला जिस दिन तैयार होकर उतरती है गर्दन घुमा के दोबारा देखना ही पड़ता है। अभी जब गणपति में गिद्दा किया था तब देखना था इन्हें , एकदम पंजाब की सोहनी कुड़ी का रूप ही धारण कर के उतरी थी मंच पर ।
कभी कभी मुझे लगता है कि इनके हँसी की सौम्यता इनके भारी भरकम एडुकेशन से आ रही है जो मुझे तब पता चली जब साल 2017 के गणपति सलेब्रेशन्स के दौरान ये सी ए के कुछ अग्रिम सर्टिफिकेशन्स देने के लिए एग्जाम की तैयारी कर रही थी। जलवा पिछले दस सालों से सी ए का अनुभव होल्ड करती हैं, सर्टिफिकेट रिन्यू करने के लिए पढ़ती भी रहती है, अपनी क्षमता का उपयोग वे ऑनलाइन माध्यमों से कर रही हैं।
साथ ही वो बेहतरीन रंगोली भी बनाती है। जल्पा पहले हमारे विंग में रहती थी । उनसे साधारण बात चीत थी। कभी उनको उतना जानने समझने का मौका नहीं लगा। सोसायटी में ऐसे ही एक हेलो हाय के स्तर की पहचान थी हमारी।
उनके नो-नॉनसेंस-प्लीज़ वाले व्यतित्व को समझना आसान है वो बहुत सन्तुलित उत्तर देती हैं हमेशा मुस्कराते हुए । उनकी बेटी की उपलब्धियों को देखते हुए जल्पा के एजुकेशन पर हमेशा मेरा ध्यान जाता था पर मैंने कभी नहीं पूछा कि आपकी पढ़ाई क्या हैं। 2017 के गणपति में डाँस की तैयारी के दौरान एक मीटिंग उनके घर हुई थी। तब मैंने देखा था कि किस तरह लेगो सेट से बढियाँ शहर उनकी बेटी ने पूरे डिसिप्लीन से तैयार किया हुआ था । तब उनकी बेटी 6 साल की रही होगी। ये छोटी सी बात है बच्चे खेलते हैं लेकिन जो डीसीप्लीन झील में नज़र आता है उसकी पिकचर जल्पा से होकर जाती है, जलपा का पैटर्न , परवरिश का तरीका और उनकी सादगी दिल को छूने वाली हैं। वे असाधारण हैं।