चींटी हार नहीं मानती है
कितनी मसली गयी
लुढ़काई गयी
बोझ सहे
सब नियती मान कर
बढ़ती जाती है
हम चींटी ही तो हैं
प्रकृति के आगे
इसलिए हम हार नहीं मानते हैं
बढ़ते जाते हैं
जीत की मुस्कान लिए।

#मनकेहारेहारहै #मनकजीतजीत।