सुबह सुबह ऊँघती आँखों से निकल कर टिफ़िन बनाने और स्टील के बर्तनों की टिन टुन से ज्यादा क्या ही बोला जा सकता है। टाइम के हिसाब से आपाधापी में सब रूटीनवत होता रहता है। लेकिन दिन भर की बाय और लिफ्ट में घुसने के बीच आज एक बहुत अलग संवाद हुआ।

“प्रियंका गाँधी एक्टिव पॉलिटिक्स में आ गई है ।”

“हाँ, पढ़ा मैंने।”