बिन्नी को सड़क क्रॉस करते देखा
सफेद फुल स्वेटर और सिंथेटिक की
भूरी साड़ी में।
तब वो खूबसूरत थी।
चुलबुली भी।
क्रिकेट में हमारी कालोनी की लीडर भी
लड़कों से लोहा लेती थी
पेड़ पर सरपट चढ़ती थी
उसे टायर दौड़ाना भी आता था
शाम को पानी भरती थी।
दौड़ती थी कूद कूद जगह जगह
ऐसे जैसे जीरो ग्रेविटी में ग्रह

बिन्नी को सड़क क्रॉस करते देखा
सफेद फुल स्वेटर और सिंथेटिक की
भूरी साड़ी में।
उसकी गोदी में एक बच्चा देखा
दूसरे को कलाई धर कर
टप टप चलते देखा
देखी मीनू सारीज़ की थैली
उसी हाथ मे सम्भली
बच्चे की कलाई पतली।

गोदी में मुन्ना गोलगप्पे
सा मूँह खोल कर
घप से धरता गाल माँ के
माँ दुलारते जवाब देती
बेटे को दो पुचकार के।
बिन्नी खुश थी।

जिस दिन बिन्नी खेलने न आई
उसकी मम्मी हमें बताईं
यही नियति है
सब सुंदर था।
बिन्नी खुश थी।

बिन्नी तड़के उठती थी।
लैकन के उठने से पहले
सारा पानी भरती थी।
कमरे बुहारती थी।
पूजा-पाठ का सारा जिम्मा
अपने ही सर लेती थी।
बिस्तर डस्टिंग
खान पान सब
अपना काम समझती थी।
एक बजे से पहले तो वो
दाना तक न लेती थी।

पैंतीस की बिन्नी मुरझाई है
आज लड़के से उसने दाँट खाई है
क्योंकि वो घर में अक्सर सबसे
दाँट खाती आयी है
बिन्नी से वैसे ही बरताव की
पूरे घर को आदत हो आयी है
जबसे बिन्नी दुलहिन बनकर
अपने घर में आयी है।

पर बिन्नी खुश थी।
उसके दो लड़के हुए
शहर में अपना घर हुआ
आदमी कमाता है
वो भी कमाती है।
डिजिटल डिश एन्टीना है
कमरे में टी वी देख पाती है
हाथ मे स्मार्टनफोन है
क्यूट बच्चों और सुंदर फूलों
के सुप्रभात का धरम निभाती है
फेसबुक पर धार्मिक
फॉरवर्ड का घनघोर कीर्तन है
बिन्नी खुश थी।

बिन्नी केवल साक्षर है
और वो नहीं जानती उसके
दोनों लड़के क्या पढ़ते हैं
कितनी उम्र में
मोबाइल फेसबुक और
टीवी के डिश पर क्या देखते हैं
बिन्नी नहीं समझती
नासमझ होने के खतरे
बिन्नी नहीं समझती
सूचित न होने पर
प्रगति की संभावनाओं से
विमुख हो जाने के खतरे।
वो गैर जिम्मेदार नहीं कहलाएगी

बिन्नी और उसके लड़के
खुश हैं
बिन्नी का पति खुश है
सभी एक तरह के सुख में हैं
वो टी. वी. देख रहे हैं
वो चार सौ निन्नयान्वे में
स्मार्टफोन खरीद रहे हैं
साथ मे मुफ्त एसेसरीज
वो खुद को सेटल कहती है।
बिन्नी की माँ उसका सुखी जीवन देख कर
भर भर कोर पोछती है
एक जीवन क्या बढियाँ पार लगाया उन्होंने।

#प्रज्ञा
26 दिसम्बर 2018