क्षणिका- आज मैं जज

गूँज में आज क्षणिका के लिए तस्वीर देने की बारी मेरी थी और नियम के अनुसार उत्कृष्टतम क्षणिका घोषित कर परिणाम भी मुझे ही देना था । इस पोस्ट के साथ जो तसवीर आप देख रहे हैं मैंने वही तस्वीर डाली।

इस तस्वीर पर 10 क्षणिकाएँ लिखीं गयीं उनका संकलन रचनाकार के नाम के साथ इस प्रकार है, पहली क्षणिका आज की विजेता – कविता माथुर जी के द्वारा है फिर क्रमशः जभी मित्रों के लिखे को यहाँ सहेजने की कोशिश की है।

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मैं जानती हूँ

मैं जानती हूँ
मैं जानती हूँ
तुमने
ये सब बनाया
ऐसे बनाया
ताकी ये फिर
बनाया जा सके
ये जैसा था
वैसा न रहे
ये लोग ऐसे
ही क्यों रहे
क्यो इनकी
बहुमत रहे।

मैं जानती हूँ
मैं जानती हूँ
सब जैसा था
वैसा न रहे
निर्माण को
अवसर मिलता रहे
धरती गर्म हो रही है
मेरे बच्चे बहुत छोटे हैं
और तुम क्रूर हो
और मैं
मद में चूर हूँ
अब क्या करना चाहिए
कहीं बम फोड़ देते हैं
सारी चिंताएँ
छोड़ देते हैं

न मुझमें
कोई ऐब
न मेरी बैंक
में फरेब
फिर क्यों मैं
मजबूर भी?
फिर क्यों
मैं ही मद
में चूर भी?

मैं जानती हूँ
मैं जानती हूँ
पानी ख़त्म
हो रहा है
धरती गर्म
हो रही है
और मेरे बच्चे
छोटे हैं अभी
और ये की
हो तुम ही
क्रूर भी।

किससे कहा जायेगा, किसे सुनाया जाएगा
जिसने बनाया था हमें , उसे कटघरे में लाया जायेगा

खोज

तत्सम में ईश्वर नहीं मिल रहे थोड़ा बनावटी पन मिल रहा है जैसे की ईश्वर पाने की चाह के बजाय प्रशंसा पाने की चाह अधिक होना , वहीं एक दास्तानगो की खुसरो के लिए कही दीवनगी में आँखें बंद होकर इबादत साकार हो रही है। लोग झूम कर तालियाँ बजा रहे हैं मन की डोर में कुछ ढील मिल रही है और वे गा गा के साथ उड़ने लग रहे हैं।

किंचित खोज अपने आप में रूढ़ नहीं होना चाहती इसलिए वो रूढ़ियों से विलुप्त हो रही है। पर क्या करें देश रूढ़ हो रहा है। समाज रूढ़ हो रहा है। खोजी विलुप्त हो रहें हैं।ये हमारे हाथों में नहीं।

गुफ़्तम तरीक़-ए-आशिकां

गुफ्तर वफादारी बुवाद

गुफ़्तम मकुन जौर-ओ-जफ़ा

गुफ्तर के इन ख़ैर-ए-मनास्त

अपने शाह से ख्यालों में बात चीत में ख़ुसरो पूछते हैं

“Guftam tareeq-e-‘ashiqan”
What is the way of lovers?
प्रेमियों का कर्म क्या है?

जवाब आता है:
gufta wafadari buwad”
Loyalty Forever.
स्थित निष्ठ।

फिर ख़ुसरोे गुज़ारिश करते हैं
Guftam makun jaur o jafa
“Then do not be cruel and wicked”
तो फिर क्रूर न बनें।

निज़ाम कहते हैं
“gufta ke iin kar-e-man ast”
That is my job.
यही मेरा काम है.

#प्रज्ञा

यह पेंटिंग साल 2016 में स्वाति रॉय की एक मित्र से ली गयी है, पोस्ट करने की आज्ञा भी बरसों पहले ली जा चुकी थी।

फ़ोटो साभार : स्वाति रॉय की मित्र

क्षणिका-शक्ति

गूँज में हम बुधवार को क्षणिका लिखते हैं, आज का शब्द था शक्ति।मैंने नीचे दी गयी क्षणिका लिखी।

शक्ति
माँ है,
विद्या है,
ऊर्जा है,
मैं हूँ,
आप हैं,
होने का
प्रमाण है।
एक अणु
से परम अणु
बनने का
विधान है।
सिंचित करें।
न क्षय करें
व्यर्थ पाले
व्यवधान में।

“न क्षय करें
व्यर्थ पाले व्यवधान में।”

आधुनिक जीवन शैली में हमने ऐसे सामान जुटा लिए हैं जो प्रगतिशील और हाई लिविंग स्टैंडर्ड के नाम पर हमारी एकग्रता की शक्ति का हरण करता है।
दृढ़निश्चयता की शक्ति का हरण करता है।
हमने इन्हें शौक से जुटाया है।

नेटफ्लिक्स के सी.ई.ओ. का खुले तौर पर दिया वाक्य ध्यान रहे, उनका कम्पीटिशन किसी और कम्पनी से नहीं हमारी नींद से है।

यदि आप मेरी ब्लॉग पर नए पाठके हैं तो क्षणिका के बारे में समझने के लिए यहाँ क्लिक करें

#प्रज्ञा

इश्क़-विश्क

तकनीक से कहो

एडवांस हो लें

बेलगाम दिलों को

बेबाक मोबाईलों से

बाहर आने का मन करता है।

लौटाने आये थे किताबें

और धड़कने साथ ले गए

मैं रह गयी यहीं।

कहाँ देखोगे तुम मुझे

इन शहरों में छत होती नहीं।

अजीब अहसासात हैं

तुम सामने हो तो

बात ऐसे निकलती है

जैसे उंगलियों में घूमते बाल

वहीं के वहीं ।

सुबह सुबह के विचार

सागर में कितने मोती हैं
कुछ मछुआरे लाते हैं
कुछ तुम तक पहुंचाएं जाते हैं
तुम कुछ धारण करते हो
कुछ अलमारी में धरते हो
जितना भी अर्जन कर पाए
वो सदैव ही कम होगा।
पारावार नहीं भंडारों के
स्वाति नक्षत्र की बूंदों का।

#प्रज्ञा

नज़र का खोट

जब कोई व्यक्ति मुझे बुरा लगता है तो मैं सोचती हूँ कि ये किसी न किसी का तो मित्र होगा। मतलब कोई तो ऐसे होंगे जो इसे पसंद करते होंगे इसके साथ हैंगआउट करते होंगे, हँसते होंगे। मतलब इस व्यक्ति में भी कुछ बात किसी को तो अच्छी लगती होगी।

तो चलो मेरी नज़र से कभी और देखेंगे इस बुरे आदमी को इसके चाहने वालों की नज़र से भी एक बार देखा जाए , क्या पता मेरी नज़र का खोट बदल जाये।

#प्रज्ञाकादर्शन 😊