थोड़े टाइम पहले जब यूँ हाथ में नया मोबाइल आता था तो लोग किसी पूज्य की तस्वीर पहली लेते । संस्कार है। कॉपी नई होती तो ओम , जय सरस्वती माँ जैसे कुछ लिखते । अब भी लिख लेते हैं , लोग बहुते संस्कारी हैं । फिर धीरे धीरे जैसे साल बीतता है तो कोर्स की किताब का पन्ना कहाँ और जिल्द दफन की तरह जीने के तरीकों और सामान को देखने के नज़रिये में भी बहुते फेर बदल हो जाता है।

अब देखिए कितनी बातें होती हैं जैसे कौन से शहर में रहते हैं, काम की व्यस्तता कैसी है, घर में कल बम गिरेगा की नहीं, इस साल एग्जाम देने मिलेगा की गारंटी है कि नहीं, बाहर निकलेंगे तो गोली लगेगा की बस पत्त्थर से पिट के लौट आएंगे, पानी के रास्ते देश देश टपना पड़ेगा की बस पहाड़ चढ़ के हो जाएगा, हाइवे पे गाड़ी ले के दूसरे दिन ठामे पहुँच जाएंगे की माथा पर भूस्खलन हो जाएगा , अभी खड़े हैं अभी आठ माला के मलबा में दब के खबर बन गए कहीं, घोटाला हुआ होगा पर कौन देखा है । तो इतना सब मटियामेट है कि एक नया मोबाइल का इतना संस्कारी रसास्वादन काहे किया जाए?

इसलिए आधिकारिक तौर पर अंडा फ्राई की तस्वीर कैमरे से पहली तसवीर लिए हैं।

जीवन क्षणभंगुर है इसका प्रोपोगेंडा बना कर क्या मिलेगा, जैसे गैंडे विलुप्त होने की कगार पर है वैसे हम भी नाखून से लटक कर ही सभ्यता पर लटके हैं।