फूल गुलाब का रहस्य

मखमली पंखुड़ियों पर ओस की बूँदें ! जानिए आज सुबह ही आयीं होंगी। गुलाब के खुलते पट के बीचों बीच एक रहस्यमयी किला रहा होगा। बहाने से आसमानी फरिश्तों ने गयी रात कोशिश की होगी उस किले के रहस्य को झांक आने की। ये क्या बात थी? क्यों आसमानी फ़रिश्ते रोज़ ही आते हैं क्या ढूंढते हैं? किस बात का पता करना है ? और न समझ पाए तो अपनी पहचान छुपाने के लिए सूरज की पहली किरण में ओस बन ठहर जाते हैं, उड़ जाते हैं दिन की गर्मी के साथ फिर रात आने के लिए।

वह फूल अपने साथी से बोलता था कि हमारे रहस्य दो ही हैं पहला ये की हमारा सौंदर्य ही हमारी नश्वरता है और दूसरा ये की सृजन के जो बीज हम शरीर में धारण करते हैं वे अपने निर्धारित समय पर मिट्टी में मिल कर ही फलित होते हैं।
साधारण होना क्लिष्ठ है, असहज है, दिशा के विपरीत है, विकसित होना ही प्रचलित के विपरीत जाना है , गुलाब के फूल कितनी सहजता से सुन्दर लगते हैं और उतनी ही सहजता से सृजन की प्रक्रिया को स्वरूप देते हुए इतने सुंदर शरीर को मिट्टी में दे देते हैं क्योंकि वे सहज हैं।

आसमानी फ़रिश्तों को समझ न आएगा गुलाब का रहस्य क्योंकि वे बस मोहित होकर रूप रंग की छान बीन में समय व्यतीत कर जाते हैं , वे धरती में समाते नहीं , वे धरती से जुड़ते भी नहीं।

#प्रज्ञा

फोटो साभार: कांदीवली रहेजा से बिंदु श्रीवास्तव

2 thoughts on “फूल गुलाब का रहस्य

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.