मैं जानती हूँ
मैं जानती हूँ
तुमने
ये सब बनाया
ऐसे बनाया
ताकी ये फिर
बनाया जा सके
ये जैसा था
वैसा न रहे
ये लोग ऐसे
ही क्यों रहे
क्यो इनकी
बहुमत रहे।

मैं जानती हूँ
मैं जानती हूँ
सब जैसा था
वैसा न रहे
निर्माण को
अवसर मिलता रहे
धरती गर्म हो रही है
मेरे बच्चे बहुत छोटे हैं
और तुम क्रूर हो
और मैं
मद में चूर हूँ
अब क्या करना चाहिए
कहीं बम फोड़ देते हैं
सारी चिंताएँ
छोड़ देते हैं

न मुझमें
कोई ऐब
न मेरी बैंक
में फरेब
फिर क्यों मैं
मजबूर भी?
फिर क्यों
मैं ही मद
में चूर भी?

मैं जानती हूँ
मैं जानती हूँ
पानी ख़त्म
हो रहा है
धरती गर्म
हो रही है
और मेरे बच्चे
छोटे हैं अभी
और ये की
हो तुम ही
क्रूर भी।

किससे कहा जायेगा, किसे सुनाया जाएगा
जिसने बनाया था हमें , उसे कटघरे में लाया जायेगा