गूँज में आज क्षणिका के लिए तस्वीर देने की बारी मेरी थी और नियम के अनुसार उत्कृष्टतम क्षणिका घोषित कर परिणाम भी मुझे ही देना था । इस पोस्ट के साथ जो तसवीर आप देख रहे हैं मैंने वही तस्वीर डाली।

इस तस्वीर पर 10 क्षणिकाएँ लिखीं गयीं उनका संकलन रचनाकार के नाम के साथ इस प्रकार है, पहली क्षणिका आज की विजेता – कविता माथुर जी के द्वारा है फिर क्रमशः जभी मित्रों के लिखे को यहाँ सहेजने की कोशिश की है।

ये मृदु-स्मित , ये भोलापन
ये हरियाली, सुंदर कानन,
इक नद है दूर लहराती हुई
और मुस्काता अपना बचपन
कविता माथुर

लबों पे ख़ुशी दिल मस्ताना,
दुनिया से जुदा ये याराना,
प्रकृति मौजों का आशियाना,
खूबसूरत है ये अफसाना !!!
– काव्यांजलि जी

एक दो तीन चार
चारो मिल कर साथ चलें
तो कर दे चमत्कार
लो मैं आ गया पांचवां
करेंगे चमत्कार को नमस्कार ।
– मुकेश कुमार सिन्हा जी

कुछ चंद पलो को समेट लेते है
बंजर के जगह हरियाली से,
आओ कुछ हम खेलते है कुछ तुम खेलों
चलो सब मिलकर एक मुस्कान देते है।
– मिंटू जी

आसमाँ का ब्लैकबोर्ड और
कुदरत की क्लास रूम ;
हरी भरी किताबें अपनी
पढ़ाई हो बस झूम झूम।
– संतोष कदम

हो गुफ़्तगू यारों दे नाल
जबहो मिलिहे तो ख़ूब कहिये -बतीयबे करिह
कोनों कुछ कहता
कोनों एने उछलता ,कोनो ओने पेड़ पर लटकता।
– (नाम उपलब्ध नहीं है अभी)

सिखाते सुलह का गुर
दिखावे की दोस्ती से दूर
उधम-मस्ती में नन्हों की फौज
दुश्मनों को करते चूर
– विभा रानी श्रीवास्तव

सभी द्वन्दों से मुक्त,
चंचल पवन सी उन्मुक्त,
अनघड़ उम्र के पक्के रिश्तों की
स्वछंद मुस्कान
– सखी अनुपम चितकारा

हम सारे मिट्टी के खिलौने
पाव, सवैया, आधे, पौने
छल-मल, कपट और गुरूर
हमसे रहते कोसों दूर….
-अनिल जी

न जात न धर्म न पद न ही कोई वादा होता है
हम बच्चों में सिर्फ इंसानियत का नाता होता है।
-शैल जी

फोटो साभार: मितेश सोनी

तस्वीर मैंने हॉबी फोटॉग्राफर मितेश सोनी जी से ली जो इस विधा में माहिर हैं, वे हमारे कार्यालय में डेवोप्स इंजीनियर हैं।
इन क्षणिकाओं का संकलन इसलिए भी आवश्यक था की भई जिसने तस्वीर ली उन्हे भी तो इन्हें पढ़ने का आनंद प्राप्त हो।

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