वादा वचन

तुम भागते रहे
प्रतिबद्धताओं से
दिए गए वचनों से
मैं भागती रही
शहर शहर
हमारा बचपन घसीटते हुए
मुझे लोग दिखते थे,
वे मुझसे सब छीनते थे।

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