तुम भागते रहे
प्रतिबद्धताओं से
दिए गए वचनों से
मैं भागती रही
शहर शहर
हमारा बचपन घसीटते हुए
मुझे लोग दिखते थे,
वे मुझसे सब छीनते थे।

किस्मत से सालों बाद
मिलना हुआ बेटी से
वो आखिरी मुलाकात
ही तो थी
जो वादों पर
खत्म हुई
मैंने आँसू गिरा दिए
उसने वादे बहा दिए।
तुम्हारा खून बोलता है
तुम्हें नाज़ होना चाहिए।

#प्रज्ञा