मझोलेपन को आग लगाओ

आज मैंने श्रीकांत वर्मा द्वारा लिया गया ऑक्टविया पॉज़(1980 में भारत में मेक्सिको के राजदूत) का साक्षात्कार पढ़ा। पढ़ने के बाद मेरी यह सोच और भी पक्की हो गयी है कि हमें हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को लिखने बोलने में स्वयं को प्रतिदिन प्रबल करना है। हम भारतीयों की बौद्धिक मध्यम वर्गीयता तब तक बनी रहेगी जब तक हम केवल अंग्रेज़ी को घर आये मेहमान की इज़्ज़त बख्शते रहेंगे।

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जीवन एक उपलब्धि है

सुप्रभात।
सच तो यही है कि जीवन अपने आप में ही किसी उपलब्धि से कम नहीं।
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Collaborating with YourQuote Didi

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