दिसम्बर’18 की डायरी के पन्नों से

मैंने चाय पी ली है।
अच्छे कपड़ों में हूँ ,
और दरवाज़ा बंद कर दिया है।
समाज से कट जाने के लिए।
क्यों और क्या से बच जाने के लिए।
बैठ बिस्तर पर शिथिल हाँथ-पाँव
छोड़ कर देह दिशाहीन संवाद लिए।

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