ज़िन्दगी मेरा वादा है तुझसे

मैं राह चलते महसूसती चलूँगी
बस स्टॉप के झोपड़ों की कतार
फ्लाईओवर के नीचे मटमैली चादर में
झूलता नवजात, बातों में मग्न बैठी माँ,
उसके बाल सँवारता खुली देह का पुरूष,
जिसकी शर्ट डाली थी औरत ने
जब तक कचरे के पहाड़ पर बिछी साड़ी
सूख कर तैयार नहीं होती।

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100/100

#100/100
मुझे 2002 में 100 में 94 आये थे हिंदी दसवीं में तब CBSE की तरफ से (.1% merit certificate ) मिला था मुझे। आज जिन्हें हिंदी से प्यार नहीं जो रोबोट की तरह एक गाइड की रटी भाषा उड़ेल के चले आते हैं वे भी बच्चे सौ में सौ लाते हैं।

कोई साठ – सत्तर प्रतिशत वाला होगा देखिएगा दबाए कुचल दिए गए आत्मविश्वास की अलख लेकर धीरे-धीरे आगे आएगा।

वो कम्पनियों में पैंतीस लाख का पैकेज लेकर बाहर और सत्तर माले की पांच बी एच के की बड़ी बिल्डिंग में तो जल्दी न जा पाये।पर अपने मन की सुनेगा , कहानियां लिखेगा , घूमेगा शहर शहर ,कागज़ छापेगा रंग बिरंगे सपनो वाले, नई दुनिया के बच्चों के लिए जिन्हें प्रकृति और हिंदी से जोड़े रखना ज़रूरी होगा।वो बिन विशिष्ठ पहचान का छात्र जिसकी न तस्वीर आएगी न इंटरव्यू होगा पैंतीस की उम्र तक आते आते समाज का क्रूसेडर होगा।