मेरी अंग्रेज़ी

बैजू सर, चिन्मय बेनर्जी सर और दुबएन्दू बिस्वास सर की अंग्रेज़ी की कक्षाओं से निकलने के लगभग सत्रह साल बाद अब इतनी अंग्रेज़ी बोल-लिख लेती हूँ कि विचार बिना मानसिक ट्रांसलेशन के व्यक्त हो जाते हैं। कार्यालय में बेहतर कम्युनिकेशन स्किल्स के लिए भी पहचान बनी।

मौजूद समय तक आने की तैयारी टूटी-फूटी घबराई अंग्रेज़ी लेके 2002 से बड़े पापा – बड़ी मम्मी के साथ बैठ राँची में उनकी डाइनिंग टेबल से शुरू की थी।

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