Dear Dadi Ma

The stars wish you good night today and
twinkle when you acknowledge this day.

Breeze from your heavenly abode touch
my forehead and leaves a message ,
What may come, your mere thought shall save me whenever life is at cliff’s edge.

You are the diety of my life you are my pen you are my voice.
I have always written, sang and performed in your rememberance.

My feelings so powerful roll down my cheeks as I call you Avilamba.
I hold no hopes from anyone but you
dear mother Jagdamba.

Pragya

आदमी नहीं है meme

Meme बनने के चक्कर मे साधारण लोगों को अपने आसपास उपहास का कारण बनना पड़ जाता है। जिस बच्ची की तस्वीर 100/100 लाने पर हिंदी का meme बन इधर उधर फारवर्ड की जा रही है , हमारी अपनी लड़की होती तो वाकई अच्छा नहीं लगता, हम “देख देख” कह कर एक दूसरे को नहीं फारवर्ड करते।

अगर इस तरह के meme हमारे मोबाइल पर आएं जो किसी भी स्त्री पुरूष लड़का लड़की को बेवजह उपहास में कुख्यात करते हों तो तुरन्त फारवर्ड स्टॉप कर देना चाहिए और दस्तों से आग्रह कर लेना चाहिए कि या तो चेहरा हटा दो या केवल बात लिख कर विरोध कर लो न फ़ोटो घुरियाते रहो।

#आदमीनहींहैmeme

ज़िन्दगी मेरा वादा है तुझसे

मैं राह चलते महसूसती चलूँगी
बस स्टॉप के झोपड़ों की कतार
फ्लाईओवर के नीचे मटमैली चादर में
झूलता नवजात, बातों में मग्न बैठी माँ,
उसके बाल सँवारता खुली देह का पुरूष,
जिसकी शर्ट डाली थी औरत ने
जब तक कचरे के पहाड़ पर बिछी साड़ी
सूख कर तैयार नहीं होती।

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100/100

#100/100
मुझे 2002 में 100 में 94 आये थे हिंदी दसवीं में तब CBSE की तरफ से (.1% merit certificate ) मिला था मुझे। आज जिन्हें हिंदी से प्यार नहीं जो रोबोट की तरह एक गाइड की रटी भाषा उड़ेल के चले आते हैं वे भी बच्चे सौ में सौ लाते हैं।

कोई साठ – सत्तर प्रतिशत वाला होगा देखिएगा दबाए कुचल दिए गए आत्मविश्वास की अलख लेकर धीरे-धीरे आगे आएगा।

वो कम्पनियों में पैंतीस लाख का पैकेज लेकर बाहर और सत्तर माले की पांच बी एच के की बड़ी बिल्डिंग में तो जल्दी न जा पाये।पर अपने मन की सुनेगा , कहानियां लिखेगा , घूमेगा शहर शहर ,कागज़ छापेगा रंग बिरंगे सपनो वाले, नई दुनिया के बच्चों के लिए जिन्हें प्रकृति और हिंदी से जोड़े रखना ज़रूरी होगा।वो बिन विशिष्ठ पहचान का छात्र जिसकी न तस्वीर आएगी न इंटरव्यू होगा पैंतीस की उम्र तक आते आते समाज का क्रूसेडर होगा।

चैंपियंस ऑफ द अर्थ

अब जबकी सारी बातें हो गयीं
हम “चैंपियंस ऑफ द अर्थ ” हो गए
और सारे मसले सुलझ गए
तो कछुए के गले का
प्लास्टिक निकालें!
उसकी कमर में
अलमुनियम की तार
लिपटी पड़ी है।
लोमड़ी मर्लपेट के डब्बे में
मूँह फँसाये पड़ी है।
उजले पोलर भालू
की तस्वीर में भुखमरी
का कुछ कर सकते हैं?
या की हम केवल प्रमाण पत्रों में
विलुप्त होते गैंडा प्रजाति को
कुछ दिन का मेहमान भर
घोषित कर सकते हैं?

हमने बूँद बूँद को तरसते लोग देखे हैं!
हमने डालडा के खाली गैलन को
ब्रह्मास्त्र में बदलते देखे हैं!

कल केरल ,आज ओडिशा
मेरे शहर का सी शेप शोर
आखिर उसे कब तक बचाएगा !
कभी तो पानी गले तक आएगा
क्या गाय गोबर गोमूत्र से ऊपर उठकर
ग्रेटा थेँबेर्ग की बातों पर
समय रहते गौर किया जाएगा?

Pragya Mishra

आवाज़

पढ़ो खूब सारी किताबें,
कला और इतिहास की
देश और समाज की ,
समझो सारी कड़ियाँ
जिनसे होते हुए
तुम्हारा आज बना है,
एक स्त्री के लिए
क्या और क्यों ये
निर्धारित परिवेश बना है।

फिर बुलन्द करो आवाज़
बोलो , लड़ो ,बढ़ो
न सहो बेबुनियाद
वे रीति रिवाज़
जो तुम्हारी पह्चान
फलाने की बहू
से इतर निकलने नहीं देते।

प्रश्न करो स्त्रियों से
पुरुषों से रूढ़ियों से
तोड़ तो मनु के बनाये
वे नियम और समाज
का घुटन भरा ढाँचा,
जो विवाहोपरांत
तुम्हारे अंत: का संगीत
जीवित रहने नहीं देते।

ये औरत की स्वन्त्रता का नया स्तर होना चाहिए।
प्रज्ञा

दिसम्बर’18 की डायरी के पन्नों से

मैंने चाय पी ली है।
अच्छे कपड़ों में हूँ ,
और दरवाज़ा बंद कर दिया है।
समाज से कट जाने के लिए।
क्यों और क्या से बच जाने के लिए।
बैठ बिस्तर पर शिथिल हाँथ-पाँव
छोड़ कर देह दिशाहीन संवाद लिए।

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