मिलना खुद से

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प्ले ग्रुप

प्ले ग्रूप

बचपन , माँ के दुप्पटे औऱ
पापा की घुघुआ-मन्ना
से बाहर निकल रहा है
प्ले ग्रुप की तरफ बढ़ रहा है।

रंगीन झाँकियाँ खिलोने
अद्भुत दृश्यों से सजी
दीवारों पर लटकी
सपनीली दुनिया में
ऊँघता अंगड़ाई लेता
नईं किताब खोल रहा है।

बचपन, अपने नन्हे पैरों
के जूते चप्पल सैंडल
खुद सम्भाल ताखे पर
रख रहा है।

माँ बाप का दिल है
बिना बात भी धड़कता है!
हर दिन दो घँटे ही सही
ढाई साल का
केलजे का टुकड़ा
डिसीजन मेकिंग
सीखने चला है!

तस्वीर साभार – Tiny Tots Kandivali(E)

One Life Advice

हाँ ये अलग बात है कि आप कहें हम सर्विस कमीशन वाले हैं और छठी की किताब से दोबारा शुरू करेंगे लेकिन हकीकत में ज़िन्दगी की किताब से एक दिन का पन्ना निकल गया तो निकल गया ।