फूल गुलाब का रहस्य- KukuFM3Jul

फूल गुलाब का रहस्य

हेलो दोस्तों।

कुकू एफ एम पर शतदल के श्रोताओं को प्रज्ञा का नमस्कार ।
आज बुधवार है, आप सुन रहें है “इत्मिनान के ख़्यालात”!

आज का विषय है “फूल गुलाब का रहस्य”

दोस्तों गुलाब का फूल बेहद ख़ास माना जाता है । पहला हो या पांचवा इज़हारे मोहोब्बत का रास्ता इसी फूल से तय किया जाता है। लाइव देंगे की इमोजी में देंगे ये भौतिक सामिप्य पे निर्भर करता है।

सफेद , पीला, लाल , गुलाबी रंगों के साथ रिश्तों के मायने जोड़ कर बिना कुछ कहे-सुने गुलाब सारी बात बना देने का माद्दा रखते हैं।

गुलाब कभी डायरी में बंद इतिहास के साथ अमर ही दम लेते हैं। तो कहीं किसी मेज़ की शोभा बढ़ाते हैं। अधिकतर काम पूरा होने के बाद गुलदस्ते में सूख कर डस्टबिन की शरण पाते हैं।

तोहफे में दिए गए गुलाब के फूल का सफर कैसा होगा ये पाने वाले की उम्र , आथिर्क स्थिति, राजनैतिक दृष्टिकोण और घर-बार वाला होने पर निर्भर करता है।
अब तो अगर गुलाब पाने वाले की उम्र सोलहवें पड़ाव पर है तो वो घन्टों टेडी बियर की तरह गुलाब के फूल को पकड़ फोन पे बात करेगा और पत्ती पत्ती पुचकरेगा।

अगर वो रोज़गार योजना, बिजली और पानी की जुगत जूझ रहा पचीस वर्षीय युवा है तो ” हाँ ठीक है , बढियाँ फूल है ,थैंक्यू ” बोलकर फूल को पेंन स्टैंड में रखदेगा पाँच दिन बाद सफाई में निकाल देगा ।

निराला की सोच से प्रभावित वाले तो वहीं के वहीं गुलाब के फूल को कैपिटलिस्ट की संज्ञा देकर अपने प्रेमी अथवा प्रेमिका की शाम को कार्ल मार्क्स से भर देंगे। इस केस में फूल अब किसी को याद नहीं।

बंधू फरारी बुगाटी में ही चलने वाले निकले तब तो फूल की आ गयी शामत क्योंकि अपने प्रेम की निशानी को अजर-अमर कर देने के लिए वो उसके पत्तों को सोने से कोट कराएगा , सुखा कर हीरे की अंगूठी में भरवायेगा, फूल के मृत शरीर को चांदी के फ्रेम में डाल कर बैडरूम सजायेगा।

फिर आखिर में आते हैं घर बार वाले अति साधारण बड़े लोग जिनके पास अगर गुलाब आये तो उसके फेसपैक बनाएंगे, फ्लावर पेटल रूम फ्रेशनर बनाएंगे, गुलाब जल में नहाएंगे और कुछ नहीं तो दवाई के नाम पर चबा लेंगे ।

इतना सब होने के बाद गुलाब के फूल फिर जन्म लेते रहना चाहते हैं क्योंकि उनके सौंदर्य की गति किसी के रिश्ते और घर की शोभा बढ़ाना नहीं है। बल्कि सूख कर मुरझा कर फिर मिट्टी में मिल जाना है। यहीं उसे आनंद मिलता है। बगीचे में माली की देख रेख में बड़ा होना और सूर्य की किरणों के साथ खेलना उसके पोषक पल हैं।

मखमली पंखुड़ियों पर ओस की बूँदें ! जानिए आज सुबह ही आयीं होंगी। गुलाब के खुलते पट के बीचों बीच एक रहस्यमयी किला रहा होगा। बहाने से आसमानी फरिश्तों ने गयी रात कोशिश की होगी उस किले के रहस्य को झांक आने की। ये क्या बात थी? क्यों आसमानी फ़रिश्ते रोज़ ही आते हैं क्या देखते हैं? किस बात का पता करना है और न पहुँच पाए तो अपनी पहचान छुपाने के लिए सूरज की पहली किरण में ओस बन ठहर जाते हैं, उड़ जाते हैं दिन की गर्मी के साथ फिर रात आने के लिए।
वह गुलाब का फूल अपने साथी से बोलता था कि हमारे रहस्य दो ही हैं पहला ये की हमारा सौंदर्य ही हमारी नश्वरता है और दूसरा ये की सृजन के जो बीज हम शरीर में धारण करते हैं वे अपने निर्धारित समय पर मिट्टी में मिल कर ही फलित होते हैं।
साधारण होना क्लिष्ठ है, असहज है, दिशा के विपरीत है, विकसित होना ही प्रचलित के विपरीत जाना है , गुलाब के फूल कितनी सहजता से सुन्दर लगते हैं और उतनी ही सहजता से सृजन की प्रक्रिया को स्वरूप देते हुए इतने सुंदर शरीर को मिट्टी में दे देते हैं क्योंकि वे सहज हैं।

सहजता से नश्वर होने में सुखी रहना एक रहस्य है, आसमानी फ़रिश्तों को कभी सामझ न आई क्योंकि वे तो बस धरती के सुखों और रूप रंग की छान बीन में रात निकाल जाते हैं , वे धरती में समाते नहीं , वे धरती से जुड़ते भी नहीं।

मित्रों कई कविताओं में स्त्रियों को उनके सौंदर्य के लिए गुलाब से जोड़ कर देखा गया है , मैंने भी कोशिश की लेकिन मुझे बस यही समानता दिखी की उसने उससे सुगन्ध आती है जिसे मुस्करा कर महसूस किया जा सकता है मसल कर नहीं ।

मेरी ये कविता गुलाब की भिनी खुशबू सी महकती औरतों के लिए जो हमारी ज़िन्दगियों को सदाबहार रखती हैं:

अगर तुम डिब्बे में बंद
चुक्कू-मुक्कू सी बैठ
हँसली पर प्याज़ भर
ही काट रही हो,
तो भी तुम्हारी सोच से
इस देश पर
फ़र्क पड़ता है।
तुम्हे सल्फर की आदत
हो चली है।
आँख का पानी
ओढ़नी पर सूख चुका है
उसी अवस्था में
तुमने बच्चे स्कूल भेजे
नाश्ते में पराँठा खिलाया
टिफिन पैक भेजने के बाद
लगे हाथ समय पर बस पकड़वाई।

अब सभी काम पर हैं
तुम भी पीछे नहीं छूटी
तकिये का कवर
सिल रही हो।
कभी गेंहूं पसार रही हो।
फ्रिज अलमारी किताबों की रैक
पर जमी धूल हटानी है।
फिर अचार लगाना है।
शाम में मसाले कुटवाने है।
तुम हर रोज़ !
एक नए दिन की
तैयारी में हो ।

सालहा साल
कई दिन आते रहे थे,
तुम बुलाते रहे थे
और अब जब
तुम्हारे उधर जाना नहीं होता ,
तुमसे मिलना नही होता
तुमको बताना नहीं होता
तो क्या इससे भी जायें ?
*चलो आज मौके पर मोहोब्बत जतायें।*
एक गुलाब किसी अपने को दें और प्यार बाँट आएँ।

This slideshow requires JavaScript.