बचपन

जिन सपनीली आँखों में दुनिया समेटी है, वहीं ख़ुशी मिलती है ।

हमारे प्यार की पुड़िया बन्द इनकी छोटी सी मुट्ठी में मिलती है!

जब-जब खुली देखो उड़ी बनकर तितलियाँ खाबों के सिरहाने।

कुछ तस्वीरें विंग की लॉबी से सहेजे बचपन।
शहर का आदमी कितने एंगल ले आएगा ,
कभी मॉल जाएगा कभी मल्टीप्लेक्स
लेकिन इंसानी खूबसूरती को निहारने की कोशिश
कैमरे हज़ारों तरीके से करते आये हैं करते रहेंगे
क्योंकि सम्वेदनाएँ जगह की मोहताज नहीं।

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