हमारी बौद्धिकता हमारी ज़िम्मेदारी।

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कश्मीर से कन्याकुमारी तक बाहें फैलाये हमारे देश में पिछले कुछ हफ्तों में अनेक बातें हो गयीं कहीं पूरा उत्तर पूर्व और बिहार बाढ़ की चपेट में आ गया तो कहीं दक्षिण भारत और महाराष्ट्र के कितने जिले घोर पानी के संकट से जूझ रहे हैं।

फिर देखिए तो तृणमूल को सोनभद्र तक पहुंचने से पहले हवाई अड्डे पर ही रोक दिया गया तो कहीं प्रियंका जी को हिरासत में ले लिया गया । तब मीडिया वालों ने चलाई क्लिप्पिंग जोगी जी के हेलीकाप्टर से उतर कर घटना स्थल पर जाने तक की उसपर एक बढियाँ से लूप लगा दिया कि बार बार जोगी जी जाते दिखायी देते रहे और न्यूज़ चलती रही।
आगे आये कौन भाग किसके साथ भागा जाती बिरादरी , मेरी नाक वगैरह वाले समाचार।

फिर आते हैं खूब रस लेकर देखे गए समाचार जैसे तांबे के बर्तन में फलाना मंदिर पर श्रावण में लोगों ने चढ़ाए दूध तो दूध पड़ गया नीला ।

विज्ञान कहता है की केवल बाहरी चोट या आलसी होकर पड़े रहना ही हमारे न्यूरॉन को नुकसान नहीं पहुंचाता बल्कि अनावश्यक दुख , हिंसा और बेकार के वीडिओज़ देख कर भी जो न्यूरॉन कनेक्शन बनते रहते हैं उससे भी दिमाग को भारी क्षति होती है। बुद्धि प्रभावित होती है ।ऐसे में बहुत आवश्यक होता है की हमें कौन से समाचार की जानकारी रखनी है और क्या नहीं देखना है।

बहुत ज़रूरी है की हमें देश की घटनाओं की जानकारी हो खेल , कला , साहित्य , विज्ञान की जानकारी हो। आपदा से जुड़ी बातों का समाचार प्राप्त हो , नए कीर्तिमान जो भारत ने बनाये उस पर पढ़े सुने । धार्मिक न्यूज़रूम चर्चा देश का भला नहीं करती उससे बचना चाहिए । खुद अपना बौद्धिक स्तर हमको निर्धारित करना चाहिए।

हम भारतीयों को अपने ज्ञान की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए बहुत ज़रूरी है ये तय करना की हमको टी वी और अखबार में क्या देखना है और क्या पढ़ना है। हम धर्म के उपासक भर हैं या ज्ञान गुरु हैं और अपने कर्म के स्वयं निर्धारक हैं।

जब अखबार और टेलीविजन आपको ऐसे स्तर कर समाचार परोस रहे हों जो आपको खबर देने की बजाए आपको एक तरह की मनोग्रन्थि से भर दें । ताज़ा सोच पनपने ही न दें उस समय कुकू एफ एम जैसा एक ऑनलाइन रेडिओ का प्लेटफार्म आपको ज़रूर सुनना चाहिए जिससे की आप यदि किताबें न भी पढ़ पा रहे हों तो विचारों में नयापन आये।

समय सबके लिए अलग अलग गति से चलता है, किसी को हराता है, किसी के लिए बदलता है तो किसी का पलट जाता है। हिमा दास की गति पाँच स्वर्ण पदकों के साथ सबको पछाड़ गयी। हिमादास बनना है हमें, आगे बढ़ना है हमें ।

पूरी तरह देसी तकनीक से बना चन्द्रायण , चाँद के दक्षिणी हिस्से पर उतारा हमने और ख़ुद को शुमार किया उन राष्ट्रों में जिन्होंने झंडे चाँद पर गाड़े। हमसे पहले अमेरिका, रूस, जर्मनी और चीन कुल चार ही देश सफलता पूर्वक उतर पाए हैं। ऐसे कीर्तिमान कर्म से हासिल होते हैं ।

पेपर वेपर क्या पढ़ें
कितने मरे कितने गड़े
कितने गड्ढे खुदे पड़े
कहीं नहीं है बौद्धिक विकास की बात
खेल कला साहित्य की खबरें
सब लील गया धार्मिक विवाद
कैसा भी कोई माध्यम हो
आप उठा कर देख लो
जितना घटिया स्तर होगा
लाइक बटोरे ततपर होगा
उतना उसका भाव बढ़ेगा
इंटेलिजेंट बातों का रेट गिरेगा
जनता की सोच का स्तर घटेगा
निर्बाध राज करेंगे नेता सभी
भीड़ से उठ कर सोच विचार
उनको चुनौती कोई देगा नहीं
हमें विचार शून्य करने में उनको तनिक नहीं शर्म है
हम भी हुए ढीठ जानते हैं केवल कर्म ही धर्म है
बाकी सब वोट का मर्म है।
बाकी सब वोट का मर्म है।
पहचानिए क्या ख़बर परोसी जा रही
उतना ही लीजिए जितने में काम की बात हो रही
बाकी सब टी.आर. पी का खेल है
समय बिताने पार्क में जाईये
केहुनी गड़ाए टी वी पर
हिन्दू मुस्लिम के मत घूँट मारिए
खुद की नहीं बच्चों का ख्याल करिये
शांति के दूत ना बनें न सही
बेकार की बकर भी मत पालिये
बच्चे नहीं हैं हम आप
बरगलाने वालों की चाल में मत चलिये

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