डायरी 3 सितंबर 2019

हम सभी को पता होता है हम क्या करना चाहते हैं, बस उसे नज़रंदाज़ कर कुछ और करना तब तक करते रहते हैं जब तक अपने अंदर कुछ टूट नहीं जाता और लौटना नामुमकिन नहीं हो जाता। तुम जो जानती हो उसको मनन करो। आदमी का दिमाग सब जीवों में स्वयंभू भी है। हमने भगवान बनाये हैं, अपने जीवन का भी दर्शन कर ही लोगी।

प्रज्ञा

क्षणिका- जज लोया की आत्मा

जनाब!

कोर्ट रूम हथौड़ा प्राधिकार का प्रतीक है।
न्यायिक कार्यवाही को रोक देने और
शान्त व्यवस्थित करने में सटीक है।
लोकतंत्र का तीसरा स्तम्भ न्यायपालिका
क्या भारत में सम्प्रभु और निर्भीक है?

*जज_लोया_की_आत्मा*

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