हम सभी को पता होता है हम क्या करना चाहते हैं, बस उसे नज़रंदाज़ कर कुछ और करना तब तक करते रहते हैं जब तक अपने अंदर कुछ टूट नहीं जाता और लौटना नामुमकिन नहीं हो जाता। तुम जो जानती हो उसको मनन करो। आदमी का दिमाग सब जीवों में स्वयंभू भी है। हमने भगवान बनाये हैं, अपने जीवन का भी दर्शन कर ही लोगी।

प्रज्ञा