मेरे घर की स्थिर लक्ष्मीशाम की दिया बाती
पूजा स्थल का साज श्रृंगार
बिस्तर घर दरवाज़े से लेकर
लिविंग रूम में किताब की कतार
खिड़की पर सजी रंग बिरंगी लाइटें
पौधों के चारों तरफ घूमते
कंदील के तार
सुबह से सजाती आइडियाज़ देती
शाम को थककर
नीली शिफॉन की सारी में
झट पट तैयार हुई वो
आँखों में बस थोड़ा सा काजल
और कानों में झुमके
डालने का समय भर ,
फिर भी क्या खूब जँचती हो।
घर के इस कोने से उस कोने तक
मीठी मीठी खुशियाँ
दीवारों पर टाँग रखी हैं
सब एक शाम साथ साथ
टीम टिमाने लगेंगे
इसी रौशनी को देखने के लिए
हुई थी दिवाली की सफाई
इसी तस्वीर को जीने के लिए
भारतीय मेहनतकश परिवार
जोड़ता है पाई पाई।
तुमसे जुड़ा सुख ही स्थिर लक्ष्मी है
ईश्वर की कृपा से घर में ही बसती है
दिवाली की रात मिली सज धज
आरती की थाल लिए मुस्कराती हुई सी।