बचपन में मम्मी पापा कहीं लेजाते हैं किसी पार्टी में या फैमिली फ्रेंड्स के घर तो प्रस्थान से ठीक आधे घन्टे पहले वहाँ मौजूद बच्चा पार्टी में खूब गहरी मित्रता हो जाती है, फिर अचानक ख़बर होती है कि चलो बेटा अंकल आँटी को बाई बोलो हम अब चल रहे हैं।
फिर बच्चे आपस में दौड़ भाग में दस मिनट और कर के खेलते रहते हैं और फिर मन मसोस कर अपने अपने गंतव्य चल देते हैं।

मुंबई में Reema की दोस्ती समय का वही आधा घन्टा रही, काफी समय से सोसाइटी में थी लेकिन विदेश प्रस्थान से ठीक कुछ समय पहले ही अच्छी जान पहचान और घनिष्ठता हुई। मज़े की बात ये है जिस दिन मुझे एहसास हुआ कि इससे साथ तो ट्यूनिंग अच्छी है उस दिन मैं समझ गयी थी कि वही आधा घन्टा शुरू है… ये हुआ और अचानक ख़बर आयी मैडम सपरिवार यूरोप जा रही हैं और उनका परमानेंट निवास स्थान तो मुम्बई है ही नहीं कानपुर है, मैं अपने अंदर से उठी भविष्यवाणी पर मुस्करा दी ।

इन तस्वीरों में Rashmita नहीं, वे थोड़ा और पहले विदेश प्रवास में चली गयीं थीं।

Merry Christmas.