अपने आपको ऐसे देखना सुखद है। एक बार गिरते पड़ते जब बाउंड्री बचाई थी तब नेपथ्य से “कमिटमेंट कमिटमेंट” सुन कर अच्छा लगा था। फिर एक छूटती बचती कैच जो चश्मे के खुलने पर भी हाथ में रुक चुकी बॉल से मिली उसका सुख बस्किन रॉबिन्स की ब्लैक करंट डबल स्कूप एकांत में खाने बराबर था। स्वान टीम के वाट्सप समूह में ज्योति ने तसवीरें साझा की हैं।

किसी हॉलीवुड मूवी के सुखांत की तरह हमारी धुरंधर बल्लेबाज़ अंजली तेंदुलकर ने आज सुबह सीन का अंतिम डायलॉग रखा:

“टुडेज़ प्रैक्टिस एट व्हाट टाइम कैप्टेन”

जल्पा मुस्कराते हुए पूछतीं हैं

“9 PM?”

और पिक्चर शानदार हँसती तस्वीरों के साथ समाप्त होती है।

तस्वीरों में जो अन्य लेडीज़ दिख रहीं हैं उनके नाम हैं ज्योति और करुणा बैटिंग करते हुए, तृप्ति करतल की मुद्रा में उत्साह वर्धन करती हुई।

तारे ज़मीन पर सिनेमा में फिल्माया गीत , गीत कार – हैं प्रसून जोशी और संगीतकार – शंकर, एहसान, लॉय। बेहद सटीक जाएगा न इस तस्वीर पर।

खोलो खोलो दरवाज़े
पर्दे करो किनारे
खुंटे से बँधी है हवा
मिल के छुडाओ सारे
आजाओ पतंग लेके
अपने ही रंग लेके
आसमान का शामियाना
आज हमें है सजना

तू धूप है, झम से बिखर
तू है नदी.. ओ बेख़बर
बह चल कहीं, उड़ चल कहीं
दिल खुश जहाँ..
तेरी तो मंज़िल है वहीं..