कांदीवली ठाकुर महाविद्यालय विज्ञान और वाणिज्य में हिंदी साहित्य परिषद के वार्षिक कार्यक्रम में बतौर व्याख्याता बुलाया गया था।

विषय था “आधुनिक जीवन में हिंदी की प्रासंगिकता”।

विज्ञान के बच्चों के बीच बोले, लगभग हम पढ़ा ही रहे थे, हमको भी खूब अच्छा लगा, बोर्ड पे चॉक से लिखने में ।

भारतीयता, आत्म विश्वास , स्व की खोज, जीवन का मकसद, अपने प्रति ईमानदारी, हुनर की पहचान जैसे क़ई पहलुओं को अपने अंदर ढूंढने में हिंदी हमेशा प्रासंगिक है। इसी दिशा में बात रखी मैंने।

विषय पर नई वाली हिंदी से जुड़े सभी फेसबुक मित्रो के बारे में बताया जो सब अच्छा कर रहे हिंदी में और विज्ञान या कॉरपोरेट जीवन से जुड़े हैं। आज की चर्चा में सभी बच्चे फिजिक्स डिपार्टमेंट के थे।

बच्चों को हिंदी पॉडकास्ट के बढ़ते मार्केट के बारे में बताया। आवाज़.कॉम, कुकू एफ एम, अमेज़न ऑडिबल, स्टोरीटेल वगैरह पर कैसे लोग हिंदी के ज़रिए आगे बढ़ रहे। वॉइस आर्टिस्ट एज़ पैरेलेल करियर ऑप्शन पर बात हुई।

ब्लॉगिंग की दुनिया में आज के डेट में हिंदी भाषा के बेहतरीन ब्लॉग और उनके द्वारा जेनेरेड रेवेन्यू का ज़िक्र आया चर्चा के दौरान।

मैंने सुखनवर और हिंदीनामा में मेरी प्रकाशित कविताएँ पढ़ीं।

BSC Physics कर रहे मुंबई के बच्चों के लिए ये विषय अभी अनछुये हैं इसलिए उन्होंने भी उत्सुकता से सुना।

साहित्य को नए रंग नए ढंग से पेश करने की कोशिश की मैंने विज्ञान के छात्रों के लिए।

इकतारा भोपाल से जुगनू प्रकाशन किस तरह प्लूटो और अन्य किताबों की मदद आए बाल साहित्य तैयार करता है इसके बारे में बताया। किस तरह रंगों और शब्दों में सुंदर सुखद कार्य क्षेत्र तैयार किये हैं लोगों ने यह समझने को मिला इससे।

चालीस के करीब लड़के लड़कियों ने बहुत मन से सुना यही बड़ी बात रही।

यह तुलसी का पौधा और लेटर ऑफ थैंक्स डिपार्टमेंट की तरफ से मिलते हुए तस्वीर।