प्रेम की अभिव्यक्ति बड़ी कठिन होती है।गुस्साना,चिल्लाना धकेल देना कितना सरल होता है। दुलारने और पुचकारने पर ” देखो कैसे तो नाटक कर रही है ” की दृष्टि से देखते हैं। क्रोध को इज्जत दी जाती है। इसलिए हमारे आस पास फटकार को सम्मानजनक माना जाता है और प्यार को टाइमपास हरकत मानते हैं।

नरमी रखने वाला व्यक्ति भीरू है। वह लल्लू है उसे समय की समझ नहीं। कन्नी काटकर उल्लू सीधा कर जाने वाले स्मार्ट और सापेक्षिक (रिलेवेंट) हो जाते हैं।

‘अ’ सामने ‘अ” जैसी बात करो। ‘ब’ के सामने ‘ब’ जैसी बात करो। ‘स’ और ‘द’ से बात ही मत करो। वे दिमाग लगा रहे हैं! वे तुम्हारा वक्त बर्बाद कर देंगे। तुमको नए तरकीब (आइडियाज) दे देंगे और तुम एक पैटर्न पर काम निपटाने की बजाय सुधार करने लगोगे। कितना समय देना होगा, कितनी मेहनत बढ़ा देंगे। देखो यह रहा डिब्बा इसके बाहर नहीं सोचते।

मत सोचो की सामने वाला इंसान है।

सोचो कि उसका गला दबाना तुम्हारा टारगेट और

उसकी साँस घुटना तुम्हारा प्रोमोशन

चाहिए या नहीं चाहिए प्रमोशन ?

चाहिए ना!

तो फिर लगाओ ज़ोर !

तुम नहीं तो कोई और!