शुभम कुरुत्वम कल्याणम आरोग्यम धन संपद:
शत्रु बुद्धि विनाशाय: दीप ज्योति नमोस्तुते ।वे जिनके घर और पेट इस लोकडाउन के मध्य भरे हैं , वे सभी इस श्लोक का सहर्ष पाठ कर सकते हैं। जिनके साथ कोई समस्या है, साधन की कमी या भूख की आग होगी, उन्हें संस्कारों की थाती तो हम नहीं पकड़ा सकते। फिर भी सबल वर्ग अपनी ऊर्जा से समाज के त्रस्त वर्ग के लिए प्रार्थना रत रह सकते हैं। यह प्रतीकात्मक है। सुप्रभात।