आज पृथ्वी दिवस पर हम सबको अपनी लघुता और सामर्थ्य की नगण्यता का भान होते रहना चाहिए। स्वयं देख लीजिए यह पूरी धरती बह्मांड के एक ज्ञात छोर से औरत के माथे की बिंदी भर भी नहीं दिखती है, और अभी तो पूरा ब्रह्माण्ड ज्ञात भी नहीं। फिर भी इसके भूभाग पर वर्चस्व सिद्ध करने और यहाँ अपना शक्ति प्रदर्शन करने से आदमी बाज़ नहीं आता। यहाँ तक ही इसकी सम्पदा को खसोट कर ही मानवता को महान सिद्ध किया जाता रहा है। नतीजा सबके सामने हैं। हमारा आज और हमारे बच्चों का धरती पर भविष्य अब खतरे में है।आज पृथ्वी दिवस पर , प्रकृति की संतुलन कारी शक्तियों को प्रणाम जिससे उनका कोप हमारे आने वाले भविष्य पर थोड़ा कम रहे और जीवन चलता रहे।प्रज्ञा, 22 अप्रैल 2020मुम्बई