हमारा उजला सितारा सुशांत

मुम्बई!

तेरे कदमों में ज़िन्दगी बहुत छोटी है और शोहरत पहुँच से बाहर। आदमी लड़ता-लड़ता खुद को हार जाता है, तू थोड़ी मुलायम क्यों नहीं हो जाती, तेरे हिस्से दुआएँ कम आती है और आँसू ज़्यादा। दुःख के पहाड़ काट-काट जो बनाये गए थे घर, सब टूट रहे हैं, नींव दरक रही है, भीतर ही भीतर मिट्टी चोरी हो गयी और पता भी नहीं चला।

यकीन से परे परसों रात ही मैं और आलोक सुशांत सिंह राजपूत की बात कर रहे थे। AIEEE में ~26th rank थी, DCE लास्ट ईयर में इंजिनयरिंग छोड़ दी और एक्टिंग मे आ गए जैसा पढ़ा है !!! औऱ आज ये ख़बर ..क्या चल रहा होगा उनके मन मे उफ्फ ऐसा निर्णय क्यों !

हम सब उसे एक मेहनती कलाकार की तरह जानते थे और मृत्यु के बाद उसकी ख़ूबसूरत दुनिया की परतें धीरे-धीरे हटीं तो सबकी आँख नम हैं। हमने एक उजला सितारा खो दिया। शायद एक ऐसा लड़का खो दिया जो एक दिन भारत रत्न का हकदार होता। ज्ञान, विज्ञान, भूगोल, खगोल, कला , पर्यटन , अनुसंधान और न जाने क्या-क्या आता था सुशांत की विशलिस्ट में।

आज जब वह बोलीवुड जगत की दी हुई मायूसी से पनपे अकेले पन में हम सब से दूर अचानक चला गया है तो लोग फेसबुक पर जो मन आये वो लिखे जा हैं। कोई सुशांत को कायर कह रहा है, कोई “धरती पर रहने लायक नहीं थे तुम” ऐसे सम्बोधित कर रहा है।

एक नौजवान अवसाद से मर गया है। उसे फटकार, फेसबुक पर लंबे पोस्ट कहना निष्ठुरता का फैशन है क्या?

सुशांत की तुलना अभाव ग्रस्त ज़िंदा लोगों से करना भी असंवेदनशीलता ही है। प्रार्थना रत रहिये। इतना एनालिसिस पैरालिसिस क्यों करना ?

हो सकता है न, यम बन के डिप्रेशन आते हों बंद कमरों में चुपके से जैसे सारी सुरक्षा के मध्य एक सुरक्षित कमरे में मार दिए गए थे परीक्षित। हो सकता है न की यह यात्रा इतनी ही होगी। हो सकता है उसे जाना ही होगा। जब कुछ भी हो सकता है तो इस तरह जाना क्यों नहीं?

सुशांत , पूर्णियाँ बड़हरा कोठी के मूल निवासी थे ये बात मुझे उनकी मृत्यु के बाद पता चली। दिल और धक्क से बैठ गया। कहाँ मिलती है इतनीं ऊँचाई हम छोटे शहर के बच्चों को । एक होनहार बीरवान निकलता है तो सारे इलाके का उद्धार होता है। अब कहाँ ये सूरज फिर निकलेगा ! बड़ा लंबा अस्त हुआ है अबकी बार जैसे मन बर्फ की चादर से ढँक जाएगा और तमाम दुखों के प्रति नम्ब पड़ जायेगा।

सुशांत का जाना बिहार के एक-एक आदमी को अपने बेटे अपने भाई का जाना लग रहा है। यह कोई नौटँकी नहीं है। सुशांत भोला मेहनती लड़का था उसकी हर विडीओ उसकी हँसी से साफ झलकता है , कितनी सच्चाई थी उसमें, एक रत्ती की बनावट नहीं।बस थोड़ा गुस्सा ही जल्दी आता था न उम्र ही क्या थी।

सुनती हूँ बॉलीवुड का जो तबका ज़िम्मेदार है, रपट दर्ज हुई है उसके खिलाफ, पूछताछ जारी है । लेकिन एक बाप का जवान होनहार बेटा वापिस नहीं आएगा।

हम बिहारी वंशवादी होते हैं , बहुत ज़्यादा , और इस बात का भी गहरा सदमा लगता है कि हाय समूल वंश ही समाप्त हो गया। तमाम आधुनिकता के आगे ये सोच भी सालती ही होगी न उसके पिता को। वे अचानक और बूढ़े से दिखने लगेंगे पुत्र के बिछड़ जाने के संताप में।

सम्भावत: कल समाचार प्रसारित हो जाये की सुशांत की आत्म हत्या में उनकी अपनी मानसिक दुर्बलता अधिक ज़िम्मेदार थी, वगैरह वगैरह और पुलिस बड़ी लॉबी वालों पर केस रफा दफा कर दे । फिर भी आलिया, करन और सोनम कपूर जैसे फ़िल्म जगत की बड़ी हस्तियों के मस्ती मज़ाक में कहे प्रोग्राम उनके लिए आज भारी पड़ रहे हैं। इससे यह साबित होता है कि अच्छा पहनने ओढ़ने से , सुविधा जनक जीवन बसर करने से सोच भी ऊँची हो जाएगी कहा नहीं जा सकता ।

किसी भी उम्र में, व्यवसाय में #bully करने वाली संस्कृति पर रोक तो होनी चाहिए #ohc’mon load क्या लेना वगैरह बोलकर के #bully द्वारा उतपन्न मनोवैज्ञानिक दबाव कप हल्का नहीं कर सकते । भीतर तक घुटता है, पैसिव अग्रेशन बन कर। सभी हीलिंग प्रोग्राम नहीं अटेंड करते, कुछ लोग इर्ष्यालू , दब्बू किस्म के हो जाते हैं, कुछ हिंसक, तो कुछ आत्मघाती।

#RIPSushant

Pragya
14 जून
मुंबई।