मेरे छोटे पापा छोटी मम्मी की चालीसवीं वैवाहिक वर्ष गाँठ

2 जुलाई को मेरे छोटे पापा प्रताप झा और छोटी मम्मी पूनम झा की चालीसवीं वैवाहिक वर्ष गाँठ मनायी गयी। इससे पहले की स्मृतियाँ कलम से धाराप्रवाह निकलने लगें रुक के एक बधाई लिखनी चाहिए।

आप दोनों को बहुत बधाई।

प्रस्तुत कविता अभी से दो वर्ष पूर्व 8 फरवरी 2018 को आप दोनों के वैवाहिक जीवन से प्रेरणा लेकर लिखी थी। आप हमेशा से जीवन के रसास्वादन का हुनर अप्रत्यक्ष रूप से सिखाते रहे हैं, अनुशासित और संयमी जीवन में रहते हुए शादी-शुदा जीवन के शानदार चालीस वर्ष तय किये आपने।

जीवन तुम इत्मीनान धरो

जीवन तुम इत्मीनान धरो

ऐसी भी क्या भाग दौड़
सम्बन्धों में धैर्य भरो
मिलना जुलना भी ज़रूरी है
सैर सपाटे जाया करो
जीवन तुम इत्मीनान धरो

परिवार नहीं बैंक की एफ डी
फाइल किया और लाभ लिया
ये तिनका तिनका गुल्लक है
हर दिन जिसको सिंचित किया।
इस संचय का रसपान करो
जीवन तुम इत्मीनान धरो।

मैं विभोर मैं कितना कौतुक,
अब हाथ कमर इठलाता हूँ
वहीं खड़ा मन की रेलिंग पर
उंगली पे गिनता जाता हूँ
हैं जितने पेड़ पहाड़ों पर
उतनी अंगड़ाई रोज़ भरो
जीवन तुम इत्मीनान धरो।

मेरी छोटी मम्मी कुशल गृहणी हैं, बच्चों की परवरिश पर केंद्रित जीवन रहा है। उनसे एक बार बात हो रही थी मेरी तो उन्होंने कहा था की बेटा हम लोगों का जीवन , तो अब निकल गया तुम लोगों का ज़माना है जियो जैसे जीना चाहती हो। हमारे लिए निर्णय लेना आसान रहा है हमने वही चाहा , वही किया, उसी रास्ते गए जहाँ तुम्हारे छोटे पापा चाहे और ऐसा करने से जीवन आराम से ही कटा । अगर देखूँ तो ये प्रेम का वो रूप है जहाँ पति और पत्नी की आइडेन्टिटी मिक्स होकर ऐसे उभर कर आती है जहां आप उस जोड़े को एक दूसरे के बिना इमेजिन नहीं कर सकते। ये जोड़ा ऐसा ही नैसर्गिक जोड़ा है जहां पति एक उम्र बाद पिता की तरह ज़िम्मेदारी ले लेता है और पत्नी एक उम्र बाद माँ की तरह सब सम्भाल लेती है। यह परस्पर होता है इसमें कोई किसी पर भारी या किसी से कम नहीं होता।

कुछ दिनों में छोटे पापा अपने जीवन का सठवाँ बसंत देखेंगे। उनके रिटायरमेंट का साल होगा 2020 । छोटी मम्मी नहीं रिटायर होंगी स्त्रियाँ आजीवन होम मेकर पोस्ट पर कार्यरत रहती हैं।

अद्भुत जीवन की कितनी कहानियाँ हैं निश्चय ही उनके पास जिसमें दोनों पति पत्नी ने साहस से , सशक्त होकर होनहार बेटा, काबिल बेटी तैयार किये। अपने बच्चों की आगे की दुनिया बसाने के लिए एक एक निर्णय सम्भल सम्भल कर लिया।

जीवन के बीज चुन चुन कर बोए, उनको प्रेम पूर्वक खाद पानी दिया । छाँव में सहेजा, समय समय पर धूप दिखाई और आज एक हरे भरे वटवृक्ष सा परिवार उन्हें छाँव में रखने को तैयार खड़ा है जिसकी ओट में वे इत्मिनान से घण्टों बैठ सकते हैं।

घर,तसवीरें, किताबें, यादें, सब बड़े ध्यान पूर्वक सहेजते हैं छोटे पापा और छोटी मम्मी। अनुशासन ही जीवन रहा और बातों में भरपूर मस्ती। छोटे पापा लिट्टी चोखा अच्छा बनाते हैं।
छोटी मम्मी खीर बहुत टेस्टी बनाती हैं।

मैं आज तक और शायद मेरे बुढ़ापे तक जब भी खीर बनाउंगी यही याद करूँगी की मैंने खीर छोटी मम्मी से बनानी सीखी, जब मैं क्लास 8th में थी।

जीवन जो सहेज कर, कष्ट को खुद तक रोक कर सुंदर पीढ़ी तैयार करने वाले हमारे बड़े बेहद आदरणीय हैं और इनसे जुड़ी सभी स्मृतियाँ सहेजने योग्य।

Pragya Mishra “प्राची”

One thought on “मेरे छोटे पापा छोटी मम्मी की चालीसवीं वैवाहिक वर्ष गाँठ

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.