मैं और मेरे रूम मेट्स

#मैं_और_मेरे_रूममेट्स

2008 की तस्वीर है ये, हम सभी रूम मेट्स थे।कश्मीर की सुरभी रैना, बंगलोर की प्रियंका प्रभु, दिल्ली की आस्था सेंड्रा बीचम, मैं बिहार से, ये तस्वीर क्लिक करने वाली हैं सुनीता कौर जिनका घर शायद असम में है।इसमें कुछ मैं भूल भी सकती हूँ लेकिन कहने का तातपर्य यह है कि सुंदर भारत लेकर बसे थे हम मुंबई में। चेन्नई के थोरईपक्कम ऑफिस से एक साथ मुम्बई के लिए सेलेक्ट हुए थे और यहाँ आने के बाद सुरभि, मैं, सुनीता और आस्था हम चार अलग धर्म और क्षेत्र के लोग बच गए थे एक साथ रहने के लिए। फिर प्रियंका आयीं कुछ समय बाद थोड़े समय के लिए।

पहले साल 2008 में हम कांदीवली ठाकुर कॉम्प्लेक्स स्थित गोकुल व्यू सॉसयटी में रहते थे, वहाँ की मकान मालकिन काफी बुज़ुर्ग थीं और उनसे मिलने हम माहीम जाया करते थे। तब हमने समझा की मुम्बई में स्थान की बाहरी आभा कैसी भी हो अचानक एक शनदार दरवाज़ा दिखता है और घर के भीतर इंटीरियर तो क्या ही कहने ,आप अंदाज़ा ही नहीं लगा सकेंगे कि अभी साधारण लिफ्ट से आये सीढ़ियां कैसी सी तो थी , बाहर तक का लुक कैसा भी लेकिन अचानक वहाँ ऐसा नक्काशी किया हुआ घर अचानक ।

अब तो ख़ैर हर शहर में इंटीरियर बेहतरीन होता है लेकिन 2008 में मुम्बई के सम्पन्न घरों की इंटीरियर देख कर मेरा पहला अनुभव अद्भुत होता था । मैं पूर्णियाँ, दरभंगा, राँची, या फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी के दिनों तक वैसे पंच सितारा होटल रूम जैसे घर आम जीवन में नहीं अनुभव कर पाई थी। राँची में मेरी बड़ी मम्मी का घर भी बेहद खूबसूरत रखा था उन्होंने , पर यहाँ तो बाथरूम से बालकनी से बेडरूम से लिविंग रूम तक इटालियन फ्लोर और जैगुआर के तकनीक युक्त फिटिंग्स , क्या लाइटें, क्या सीलिंग सब जगह बेपनाह खर्च तो फिर पैसों की हाय-हाय तो बनती है।

ख़ैर, आँटी हमारे पास एक बार आयीं थीं कांदीवली , उन्होंने मेरे पूजा स्थल पर नौ रूप वाले गणपति की एक छोटी तस्वीर रखी और फिर ग्यारह महीने बाद हम वहाँ से निकल लिए उनको किराया रिन्यू ही नहीं करना था।

तो हम चारों ने ठानी कि अब इतनी दूर कांदीवली में नहीं रहंगे ऑटो का 81 रुपया लगता है। कुछ दिनों तक मरोल और शेरेपंजाब की खाक छानने के बाद आस्था, सुनीता की मेहनत के फल स्वरूप एक बंढियाँ 2 BHK हमें शेरे पंजाब शक्ति बिल्डिंग में रहने मिला था जिसका रेंट अफोर्डबले रहा इसके लिए आस्था की वाक पटुता की तारीफ होनी चाहिए। हमसे तो मोल मोलाई नहीं होता , हूँ हूँ कर के जो सामने वाला कहता मान जाते, आस्था के साथ होने से काफी फायदा हुआ घर में। सुरभि भी बहुत तेज़ तर्रार, कोई सामान या सब्ज़ी खरीदने जाओ तो सुरभि का साथ रहना ठीक था क्योंकि सुनीता को दया ही आ जाती थी वो ईमान से पूरे पैसे ही देना उचित समझती और मैं तो कुछ समझती ही नहीं थी। सुरभि को सारे दांव पेंच पता थे वो कश्मीरी पंडित तो जैसे पेट से सरवाइवल ऑफ द फिटेस्ट सीख कर आई थी, उसकी दुनियादारी की समझ पर मैं आश्चर्य चकित रहा करती।

बड़ा ज़रूरी था इन तीनों का साथ। गोकुल व्यू वाली आँटी ने जो गणपति की तस्वीर लगाई थी वो अब तक मेरे पास है। सुनीता कौर की नानक देव की एक पवित्र किताब भी सफेद कपड़े में लिपटी मेरे पूजा स्थल पर रख दी गयी थी क्योंकि सुनीता ने कहा था कि मैं रोज़ पूजा करती हूँ तो यह उसकी सिख धर्म की उस पुस्तक के लिए सम्मान जनक होगा की ऐसे स्थान पर रखी जाए। वह किताब मेरे साथ ही आ गयी। मैं सुनीता को लौटाना भूल गयी और अभी भी दुर्गा सप्तशती व अन्य किताबों के साथ ही रखी है।

आस्था को अगरबत्ती से प्रॉब्लम थी तो या तो धीरे-धीरे शायद उसके रहते अगरबत्ती जलाना मैंने छोड़ दिया या उसके रूम से निकलने से पहले पूजा समाप्त कर अगरबत्ती का प्रयोग कर लिया करती थी । सब मेनेजिबल हो गया था समय के साथ।

सुनीता कौर देहरादून वेल्हम गर्ल्स की पढ़ी थी, उसकी मानसिक स्वतंत्रता देख मुझे बड़ा अच्छा सा लगता था कि लड़की कितना आज़ाद सोचती है। उसे फिल्मों का पैशन था। वो बताती थी कि यह पैशन उसको उसके पापा से आया है। सुनीता सुबह-सुबह ऑस्कर पुरस्कार वाला टेलिकास्ट कभी मिस नहीं करती थी। इसके साथ ही सुनीता समानता के अधिकार को लेकर बड़ी सजग थी जिसका मुझसे दूर दूर तक कोई वास्ता ही नहीं था। समानता का अधिकार कौन पेड़ की चिड़ियाँ है ये सब धीरे-धीरे बाहर रहते हुए समझे। हम तो जब छोटे थे मेहतर के टच हो जाने से नहाते थे, देखे थे कि उसके जाने का रास्ता काते कात था और उसको पर्दा भी टच करना एलाउड नहीं था । हम जब से बाहर रहने लगे फिर अपना लैट्रिन-बाथरूम अपने साफ कर रहे थे। कुछ गलत नहीं लग रहा था। लेकिन इतना सब आज कल सोचती हूँ, तब तो कुछ दिमाग नहीं था। खुद के लिए लगता है कि बुद्धि आजीवन ग्रोइंग स्टेट में ही रहेगी क्या। पता नहीं पूर्ण समझदारी कब आएगी।

हम रूममेट्स का समय साथ अच्छा कटा नवंबर 2008 से मई 2010 तक हम साथ रहे। 2009 में बीच मे हमारे साथ कुछ महीनों के लिए हमारी ही कम्पनी की सात साल एक्सपीरियंस्ड टेक लीड जुड़ी थीं, वो ऑनसाइट से लौटीं थीं उन्होंने कम्पनी की एक पोर्टल पर रहने के लिए इश्तिहार दिया था जो आस्था ने देखा और बोला की आपको जबतक नहीं मिल रहा आप हमारी हॉल में रह लो, हमने हमारे लैंडलॉर्ड से बात कर परमीशन ले ली थी और वो दीदी हमारे यहाँ रहने लगीं। वो जल्द ही शिफ्ट हो गयीं थीं लेकिन उनके छोटे से साहचर्य में उनसे मैंने दाल तड़का और शिमला मिर्च की सब्ज़ी बनाना सीखा था। उसी तरीके से बनाये शिमला मिर्च की सब्ज़ी की तारीफ मेरी सास और मेरी जेठानी हमेशा करती हैं तो मुझे वो दीदी याद आ जाती थी। अब वो इस दुनिया मे नहीं रही, बड़ी कम उम्र में 2014-15 में उन्होंने दुनिया से हार मान ली। इनके बारे में और विस्तार फिर कभी क्योंकि इस सत्य का पता मुझे उनकी मृत्यु के पाँच वर्ष बाद 2019 में लगा, 2010 में शादी के बाद मैं उनसे टच में नहीं रही।

2010 में ये बड़ा सौभाग्य रहा कि थोड़ी बहुत ना नुकुर के बाद हमारे कैथलिक लैंड लार्ड रिन्युअल के लिए मान गए थे इसका श्रेय हमारी स्टार आस्था बीचम को जाता है उनकी इंटेलिजेंट वाक पटुता की बात तो मैं बता ही चुकी हूँ। हम नए साल में भी उसी जगह कंटिन्यू कर चुके थे ।इत्तफ़ाक़ से मेरी 11वीं की दोस्त अर्पिता बसु भी नौकरी करने जब मुंबई आयीं तो कहीं अच्छी जगह सेटल होने तक हमारे ही फ्लैट में रुकीं।

एक तरह से रांची के साउथ ऑफिस पाड़ा अरावली अपार्टमेंट, फिर दिल्ली नार्थ कैम्पस में साथ रहने के बाद अब मैं और अर्पिता शेरे पंजाब अंधेरी में भी साथ थे। 2002 – 2010 तक यूँ अचानक बार बार साथ हो जाने के इस क्रम पर हम दोनों बहुत आनंद पाते । अप्रैल 2010 में जिस समय फेसबुक से अधिक ऑरकुट चलती थी उस दौरान मेरी शादी तय हो गयी। मई-जून में मेरे फ्लैट छोड़ने के बाद मेरी जगह बंगालन अर्पिता बसु ने वहाँ कंटिन्यू किया। मुझे उसी शक्ति अपार्टमेंट वाले फ्लैट में सबने बैचलर्ज़ पार्टी दी थी।

आस्था, सुरभि, सुनीता सबसे बहुत प्यार मिला। आज भी फेसबुक के माध्यम से टच में हैं। वे सभी अपने अपने स्तर से जीवन में बहुत अच्छा कर रहे। अर्पिता अब फेसबुक पर नहीं पर वह हमेशा साथ रही आज भी है हमारे 1548 outram lines वाले ग्रुप में दिल से कनेक्टेड। ये बेहतरीन यादें हैं। रेड कार्पेट सी लाइफ के लिये ईश्वर को बेहद धन्यवाद क्या नायाब लोगों से मिलती रही हूँ मैं !

5 thoughts on “मैं और मेरे रूम मेट्स

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.