प्रतिबिम्ब

एक औरत
मुझे नापसंद थी,
मैं बिल्कुल वैसी
होने लगी हूँ।

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आज मेरी कविताएँ गूँज पर

आज गूँज समूह के संचालक कवि साहित्यकार मुकेश कुमार सिन्हा जी ने मेरी चार कविताएँ गूँज समूह में लगायीं, जिसपर समूह के सभी सदस्यों ने भावपूर्ण टिपन्नियां रखीं । चार छोटी कविताएँ नीचे में ब्लॉक्स में प्रस्तुत हैं। ये कविताएँ इन्नर और काव्यांकुर साझा सँग्रह में प्रकाशित हो चुकी हैं।

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