तुम प्रेम ही हो
वो जो हेमशा रहा है
हमेशा रहेगा
अद्भुत है प्रेम को देखना
नहीं मालूम था कि
ऐसा दिखता होगा प्रेम

थोड़ा सा हैंडसम
थोड़ा नर्म दिल
थोड़ा अंजान मुसाफ़िर सा
दिल मे घर कर जाए
फिर कभी न जाये
कोई अपना सा
क्या कहूँ
तुम कितने अच्छे लगने प्रेम।
किसी बच्चे की गाल पर गाल
रख देने का ख़ूबसूरत एहसास
ऐसे महसूसते हैं प्रेम।

प्रज्ञा मिश्र
10 अगस्त 2020
10:06 AM
मुंबई